महंत बाबा सीताराम चर्चा में आ गए हैं। वजह है भाजपा विधायक और उनके बीच का वायरल हो रहा वीडियो। क्या पूरा मामला है आप वीडियो देखकर खुद अंदाजा लगा सकते हैं। दरअसल, दतिया की सेवड़ा तहसील के ग्राम बेरछा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना दिया है।
कथा स्थल पर निसरोल मंदिर के महंत सीताराम महाराज और सेवड़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल के बीच हुई एक अप्रत्याशित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, विधायक प्रदीप अग्रवाल कथा में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान वे परंपरा के अनुसार महंत सीताराम महाराज को माला अर्पित कर आशीर्वाद लेने के लिए उनके चरणों में झुके। इसी दौरान अचानक माहौल बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महंत ने तेज प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को धक्का देकर अलग कर दिया और माला-प्रसाद भी एक ओर फेंक दिया। यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। कुछ क्षणों के लिए कथा स्थल पर हलचल और असहज स्थिति भी बन गई। हालांकि, कुछ ही देर में स्थिति सामान्य हो गई और कार्यक्रम आगे बढ़ता रहा।
घटना के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया, जिसके चलते लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक वर्ग इसे धार्मिक आस्था और परंपरा से जोड़कर देख रहा है। वहीं दूसरा वर्ग सार्वजनिक मंच पर इस तरह के व्यवहार को अनुचित और अस्वीकार्य बता रहा है।
अनुयायियों ने कहा कि आशीर्वाद देने का तरीका पारंपरिक है
महंत सीताराम महाराज के अनुयायियों का कहना है कि उनका आशीर्वाद देने का तरीका पारंपरिक और सामान्य नहीं है। उनके मुताबिक, बाबा का कठोर या आक्रामक व्यवहार ही उनके आशीर्वाद की विशेष शैली है। भक्तों का मानना है कि जब तक बाबा इस तरह की तीखी प्रतिक्रिया नहीं देते, तब तक आशीर्वाद प्रभावी नहीं माना जाता। यही वजह है कि उनके ऐसे व्यवहार के वीडियो पहले भी सामने आते रहे हैं और उनके अनुयायी इसे श्रद्धा के भाव से स्वीकार करते हैं।
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स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि महंत का यह अंदाज नया नहीं है। इससे पहले भी वे कई बार मंच पर असामान्य व्यवहार करते देखे गए हैं। चर्चा है कि एक अवसर पर उन्होंने व्यास गद्दी पर बैठे आचार्य को हटाकर स्वयं गद्दी संभाल ली थी, जिसके बाद भी उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठे थे।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में वीडियो बना चर्चा का विषय
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक प्रदीप अग्रवाल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं। फिलहाल, यह मामला आस्था, परंपरा और सार्वजनिक मर्यादा के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे धार्मिक विश्वास का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे मर्यादा और सम्मान की दृष्टि से देखने की बात कर रहे हैं।