उत्तराखंड यात्रा पर जाने से पहले उदय सिंह, करण सिंह का परिवार के साथ
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बस के खाई में गिरने से जिन 26 लोगों की मौत हुई है, उनमें चिखला गांव के करण सिंह भी शामिल हैं। जाते समय उन्होंने परिवार से कहा था कि एक महीने में वापस आ जाएंगे, चिंता मत करना। अब उनकी मौत की खबर से गांव में मातम है। उनके साथ गए भाई उदय सिंह और भाभी हक्की सिंह हादसे में घायल हैं।
पन्ना की पवई तहसील के गांव चिखला गांव के लोकेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार को उनकी पत्नी के मोबाइल पर रात 7.30 बजे पिता उदय सिंह का फोन आया। उन्होंने बताया कि बस खाई में गिर गई है। मेरा पैर टूट गया है। मैं घर से बाहर था। पत्नी ने फोन किया और मुझे यह सब बताया। तुरंत घर पहुंचा, उनका फोन नहीं लग रहा था। दूसरे नंबर भी बंद आ रहे थे। कुछ देर बाद फोन लगा तो बताया कि मुझे अस्पताल ले जा रहे हैं। उनसे मां और चाचा करण सिंह के बारे में पूछा तो बोले- उन्हें कुछ नहीं पता। उनका बचना मुश्किल है, बस बहुत गहरी खाई में गिरी है। इसके बाद से पिता से बात नहीं हुई है।
लोकेंद्र ने बताया कि उनके पिता उदय सिंह चिखला गांव के स्कूल में शिक्षक थे, जो 8 महीने पहले ही रिटायर्ड हुए। चाचा करण सिंह फॉरेस्ट गार्ड थे, वे भी रिटायर्ड हो चुके थे। लोकेंद्र ने बताया कि मां के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सुबह 6 बजे पता चली। वे रात को उत्तराखंड के लिए जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। लोकेंद्र ने बताया कि अभी भी चाचा की खबर पर यकीन नहीं हो रहा। वे जाते समय सबको कह रहे थे कि चिंता मत करना, हम एक महीने में आ जाएंगे। अच्छे से रहना। करण सिंह की पत्नी कृष्णा की एक साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी है। उनकी तीन बेटी और दो बेटे हैं। बेटियों की शादी हो चुकी हैं। उदय सिंह का एक बेटा लोकेंद्र और दो बेटियां है। तीनों की शादी हो चुकी है।
तीन दिन से ऋषिकेश में ठहरे थे
लोकेन्द्र ने बताया कि सभी लोग तीन दिन ऋषिकेश में ठहरे थे। वहां से पास बनने में समय लग गया। पिता से रविवार सुबह 11 बजे बात हुई थी। उन्होंने पास बनने की जानकारी दी थी। दो बजे बस आने वाली थी। ऊपर फोन नहीं लगेगा, चिंता मत करना। उन्होंने वाट्सएप पर फोटो भेजने के लिए दो नंबर भी लिखवाए थे। हादसे के बाद उन पर भी कॉल नहीं लगा।
20 दिन पहले ही बना था प्लान
लोकेंद्र ने बताया कि हमारे इलाके से 58 लोग उत्तराखंड की यात्रा पर गए थे। सभी का 20 दिन पहले ही उत्तराखंड जाने का प्लान बना था। वेदनारायण अवस्थी एजेंट सभी को लेकर गया था। एक महीने का पूरा टूर था। 21 मई को गांव से धूमधाम से सभी को यात्रा पर रवाना किया था। किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा हादसा हो जाएगा।