ओलावृष्टि से फसल की सुरक्षा के लिए अनोखी पूजा कराते हैं किसान।
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दमोह के हटा ब्लॉक के मडियादो क्षेत्र से जुड़े गांव के किसान ओलावृष्टि से फसल की सुरक्षा के लिए अनोखी पूजा कराते हैं। पूजा सफल होने के बाद रुपए और फसल भी दान में देते हैं। इस प्राचीन परंपरा को आदिवासी समाज के लोग आज भी निभा रहे हैं। ओलावृष्टि से फसल को बचाने के लिए होने वाली पूजा मतलब मेढ़ें बाधने में मडियादो के अलावा तिदनी, कनकपुरा, पाली पाठा निवास समेत अन्य गांव के सैकड़ों किसान शामिल होते हैं।
ग्राम पंचायत पाठा के बहेलियाटोला में रहने वाले पारदी समाज के लोगों का दावा है कि वह ओलावृष्टि खेतों से दूर कराने का काम करते हैं। मडियादो में डम्मन पारदी, पाठा, निवास में आजू पारदी और पाली, कनकपुरा, तिदनी में कुटी पारदी द्वारा मेढ़ बाधने का काम किया जाता है। पूजा के बाद गांव की सरहद में पूजा में उपयोग हुई लोहे की कील जमीन के अंदर दबा दी जाती है।
20 रुपए और 5 किलो अनाज लेते हैं
रवि की फसल की ओलावृष्टि से सुरक्षा के लिए गांव चाकने ,मेढ़ बांधने की पूजा के लिए किसानों द्वारा पारदी के आने पर 20 रुपए प्रति किसान या नारियल दिया जाता है। फसल आने पर 5 किलो अनाज भी दिया जाता है। इसी क्रम में मंगलवार को कुटी पारदी द्वारा तिदनी गांव से पूजा के लिए राशि एकत्रित की गई।
गांव के बाहर होती है पूजा
ओलावृष्टि से फसल की सुरक्षा के लिए गांव के बाहर एक स्थान चिन्हित कर पूजा की जाएगी। किसान पंपाई आदिवासी, मुन्नी अहिरवार ने बताया की कुटी के पिता 40 साल से यहां आ रहे हैं। अब पूजा करानेके लिए कुटी आते हैं, जिन्हें किसान पूजा के नारियल और रुपए देते हैं। फसल आने पर किसान स्वेच्छा से 5 किलो अनाज भी दिया जाता है। हमारे जैसे सैकड़ों किसान यह राशि और अनाज देते हैं। ऐसा विश्ववास है कि पारदी के द्वारा की जाने वाली पूजा के बाद फसलों पर ओलावृष्टि नहीं हो पाती है।