सिर घुमाकर चारों तरफ देखेगा दशानन का पुतला
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छतरपुर के परंपरागत दशहरा पर्व को मनाने के लिए इस बार रावण के पुतले को विशेष स्वरूप दिया गया है। स्टेडियम में दशहरे के दिन जलने वाले रावण के इस पुतले को इस बार कलाकारों ने खास आकर्षण दिया है। रावण के पुतले का विशाल सिर इस बार चारों तरफ घूमकर लोगों को देखेगा।
पिछली बार टूट गई थी कमर
बता दें कि पिछली बार जरूरत से ज्यादा बड़ा रावण बनाने से उसे क्रेन से खड़ा किया गया था। जिसे खड़ा करते समय उसकी कमर टूट गई थी। जिसके चलते उसे अंत समय तक क्रेन के सहारे साढ़े रखा गया था और जैसे ही आग लगी उसे छोड़ दिया गया था। जिसके चलते इस बार इस बात का ख्याल रखा गया कि रावण अपने दम पर खड़ा हो सके।
बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम पहुंचेगा पुतला
अन्नपूर्णा रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष राधिका गुप्ता ने बताया कि अन्नपूर्णा रामलीला समिति पिछले 70 वर्षों से रामलीला मंचन के माध्यम से भगवान राम के जीवन दर्शन को जनमानस में पहुंचाने का काम कर रही है। दशहरे पर इस पुतले को बनाकर स्टेडियम में रखा जाता है, जहां भगवान राम इसका दहन करते हैं। पुतला दहन की यह लीला बुराईयों के नाश का प्रतीक है।
इस पुतले का निर्माण कर रहे कलाकार धर्मपाल रैकवार ने बताया कि लगभग 25 दिनों तक इस पुतले के निर्माण में 15 कारीगरों ने मेहनत की है। पुतले के निर्माण में पहले चार ढांचे बनाए जाते हैं फिर इन्हें एक-दूसरे के साथ जोड़कर कपड़े की सिलाई और आतिशबाजी भरी जाती है। इस बार रावण का सिर चारों तरफ घूमेगा। सिर के ऊपर एक विशेष छतरी और हाथ में विशेष तलवार भी होगी। रावण के पुतले के भीतर रंगबिरंगी आतिशबाजी भरी गई है। 24 अक्टूबर की रात 9 बजे स्टेडियम में पुतले का दहन किया जाएगा।