उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे पिपरिया गांव में शनिवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। जहां जंगल में महुआ बीनने गए एक 14 वर्षीय बालक पर बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह घटना जिले में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव का एक और चिंताजनक उदाहरण है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय कोल पिता अर्जुन कोल अपने एक साथी के साथ शनिवार सुबह गांव से सटे जंगल में महुआ बीनने गया था। जंगल में घने झाड़ियों के बीच छिपे बाघ ने अचानक विजय पर हमला कर दिया। बाघ ने बालक को अपने जबड़े में दबोच लिया और जंगल की ओर घसीटते हुए ले गया।
यह भी पढ़ें: खराब सड़क पर अनियंत्रित हुई बाइक, दुर्घटना में युवक गंभीर रूप से घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की भीड़ घटना स्थल की ओर दौड़ी। सूचना मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की टीम भी मौके पर पहुंची और बालक की तलाश शुरू की गई। कड़ी मशक्कत के बाद बालक का शव एक नाले में मिला। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है, वहीं मृतक के परिजन रो-रो कर बेहाल हैं।
यह घटना वन विभाग और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है, क्योंकि यह बाघ के हमले की पिपरिया गांव के आसपास की दूसरी घटना है। इससे पहले, 2 अप्रैल को भी पनपथा बफर परिक्षेत्र में बाघ ने एक महिला को अपना शिकार बना लिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
यह भी पढ़ें: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ सोनकुत्तों का झुंड, देखिए वीडियो
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में जब महुआ और अन्य वन उत्पादों के लिए लोग जंगल जाते हैं, तब बाघों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में वन विभाग को पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए थे।
यह भी पढ़ें: अजाक्स संघ ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, आरक्षित वर्ग के अधिकारों की रक्षा की मांग
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना वाले क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। हालांकि, सवाल उठता है कि क्या महज पेट्रोलिंग से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है? ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें वन क्षेत्र में जाने से पहले सतर्क किया जाए, और उनके लिए वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि उन्हें जंगल में जाना ही न पड़े।