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Tiger Attack: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे गांव से 14 साल के बच्चे को उठा ले गया बाघ, खून से लथपथ मिला शव

Sat, 12 Apr 2025 05:05 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

सार

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब पिपरिया गांव में एक बच्चे पर बाघ ने हमला कर दिया। इसके बाद वो उसे उठाकर जंगल की ओर ले गया। 14 साल का बच्चा गांव के पास महुंआ बीनने गया था।
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गांव में फिर बाघ का हमला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे पिपरिया गांव में शनिवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। जहां जंगल में महुआ बीनने गए एक 14 वर्षीय बालक पर बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह घटना जिले में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव का एक और चिंताजनक उदाहरण है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय कोल पिता अर्जुन कोल अपने एक साथी के साथ शनिवार सुबह गांव से सटे जंगल में महुआ बीनने गया था। जंगल में घने झाड़ियों के बीच छिपे बाघ ने अचानक विजय पर हमला कर दिया। बाघ ने बालक को अपने जबड़े में दबोच लिया और जंगल की ओर घसीटते हुए ले गया।

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घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की भीड़ घटना स्थल की ओर दौड़ी। सूचना मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की टीम भी मौके पर पहुंची और बालक की तलाश शुरू की गई। कड़ी मशक्कत के बाद बालक का शव एक नाले में मिला। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है, वहीं मृतक के परिजन रो-रो कर बेहाल हैं।

यह घटना वन विभाग और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है, क्योंकि यह बाघ के हमले की पिपरिया गांव के आसपास की दूसरी घटना है। इससे पहले, 2 अप्रैल को भी पनपथा बफर परिक्षेत्र में बाघ ने एक महिला को अपना शिकार बना लिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

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ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में जब महुआ और अन्य वन उत्पादों के लिए लोग जंगल जाते हैं, तब बाघों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में वन विभाग को पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए थे।

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना वाले क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। हालांकि, सवाल उठता है कि क्या महज पेट्रोलिंग से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है? ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें वन क्षेत्र में जाने से पहले सतर्क किया जाए, और उनके लिए वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि उन्हें जंगल में जाना ही न पड़े।

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