उमरिया जिले में आयोजित कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ रैली’ उस वक्त फीकी पड़ गई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दौरा ऐन वक्त पर रद्द कर दिया गया। रैली की तैयारियों में दिन-रात जुटे कांग्रेस कार्यकर्ता जहां प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात को लेकर उत्साहित थे, वहीं उनके न आने की सूचना मिलते ही उनमें निराशा फैल गई।
कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पार्टी ने 27 मई को सुबह 11 बजे एक बड़ी रैली आयोजित की थी, जिसमें जीतू पटवारी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के आने की घोषणा की गई थी। रैली को सफल बनाने के लिए जिले के कांग्रेसी कार्यकर्ता बीते कई दिनों से मेहनत कर रहे थे। नौतपा की तीव्र गर्मी के बावजूद उन्होंने झंडे, बैनर, पोस्टर लगाने से लेकर जनसंपर्क तक हर स्तर पर सक्रियता दिखाई। लेकिन जैसे ही यह सूचना मिली कि जीतू पटवारी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, कार्यकर्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया।
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इस अवसर पर भाजपा के जिला महामंत्री दीपक छतवानी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं को इस तरह से निराश किया हो। इससे पहले भी एक दौरे के दौरान वे बिना किसी से मिले ही चुपचाप लौट गए थे। छतवानी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ‘संविधान बचाओ रैली’ के नाम पर कार्यक्रम कर रही है, लेकिन जब उनके नेता ही मंच से नदारद हों तो कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटना स्वाभाविक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान नहीं करते और पार्टी का नेतृत्व अब सिर्फ भाषणों और वादों तक सीमित रह गया है, जबकि कार्यकर्ताओं को बार-बार निराश किया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं की भावनाओं के साथ इस तरह का व्यवहार कांग्रेस के भीतरू हालात और नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां पार्टी खुद को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने वाली बताती है, वहीं अपने ही कार्यकर्ताओं के प्रति बेरुखी उसकी गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।