बांधवगढ़ से अचानकमार तक फैले बाघों के महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारे के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को मिल रही मंजूरियों को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत गरमा गई है। उमरिया जिले में प्रस्तावित वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से कई सवाल पूछे हैं।
बाघों के कॉरिडोर पर पटवारी ने उठाए सवाल
पटवारी ने बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर को बाघों की आवाजाही और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना बाघों की दीर्घकालिक आबादी और आनुवंशिक विविधता के लिए जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, तो इसके आसपास खनन परियोजनाओं को लगातार मंजूरी कैसे मिल रही है।
चार महीने में चार खदानों की मंजूरी का दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले चार महीनों में कॉरिडोर के आसपास चार कोयला खनन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई 2026 के बाद इस क्षेत्र के आसपास चार परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में महत्वपूर्ण स्वीकृति मिली है। इनमें पाथोरा ईस्ट करीब 1.5 किलोमीटर, मरवाटोला VII महज 53 मीटर, अर्जुनी वेस्ट करीब 3.9 किलोमीटर और अब वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) करीब 6 किलोमीटर दूरी पर बताई गई है।
1400 हेक्टेयर से ज्यादा का खनन पट्टा
वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन परियोजना का खनन पट्टा क्षेत्र 1400 हेक्टेयर से अधिक बताया गया है। इसमें 960 हेक्टेयर से ज्यादा वनभूमि शामिल है। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 8 और 9 सितंबर की बैठकों में परियोजना को आवश्यक शर्तों और दस्तावेजों की पूर्ति के आधार पर पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की गई।
एनटीसीए की चेतावनी का क्या हुआ?
पटवारी ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का हवाला देते हुए सरकार से पूछा कि यदि बाघों के कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को खतरे के रूप में देखा गया है, तो उसके आसपास खनन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। उन्होंने एनटीसीए से जुड़ी चेतावनियों और संबंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी की।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर दो महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्यों को जोड़ता है और बाघों की आवाजाही के साथ आबादी के बीच आनुवंशिक संपर्क बनाए रखने में भूमिका निभाता है। ऐसे में नई खनन परियोजनाओं की मंजूरी ने वन्यजीव संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।