सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक नगरी उज्जैन में बड़े पैमाने पर विकास कार्य करवा रही है। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़कों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है, वहीं मां शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण भी जारी है। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच अब उद्यानिकी विभाग ने सब्जियों और फूलों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत उज्जैन सहित प्रदेश के करीब 15 जिलों में कुल 16 हजार हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना से 20 हजार से अधिक किसानों को जोड़ने की तैयारी है, ताकि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय बाजारों की मांग के अनुसार सब्जियों और फूलों की आपूर्ति की जा सके।
15 जिलों में 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलोई के अनुसार, सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान सब्जियों और फूलों की बड़ी मांग रहती है। इसे देखते हुए विभाग ने दो साल पहले से ही योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत प्रदेश के करीब 15 जिलों में सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी की गई है। सब्जियों की खेती के लिए उज्जैन संभाग के उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों में करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संकर (हाइब्रिड) सब्जियों का उत्पादन करने की योजना है। यहां उत्पादित सब्जियों को सिंहस्थ मेले के दौरान उज्जैन तक पहुंचाया जाएगा।
किसानों का चयन कर दिया जा रहा प्रशिक्षण
योजना के तहत सबसे पहले किसानों का चयन किया गया है और अब उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सब्जियों और फूलों की खेती के लिए चुने गए क्षेत्रों में विशेष क्लस्टर बनाए जाएंगे, ताकि किसान संगठित तरीके से उत्पादन कर सकें। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि गर्मी और बारिश के मौसम में फसलों को बीमारियों से कैसे बचाया जाए और उत्पादन को बेहतर बनाए रखने के लिए कौन-से उपाय अपनाए जाएं। क्लस्टर आधारित व्यवस्था के माध्यम से किसानों को खेती की बेहतर तकनीक अपनाने में मदद मिलेगी। विभाग का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान मांग के अनुरूप सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बनाए रखना है, ताकि बाजार में इनकी कमी न हो।
संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग-पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज की होगी व्यवस्था
सिंहस्थ के दौरान खेतों से सब्जियों और फूलों को समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचाना विभाग के सामने बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए क्लस्टर के आसपास संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग-पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे उत्पादों को सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में सब्जियों और फूलों की मांग, उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि किस जिले से कितनी मात्रा में सब्जियां और फूल उज्जैन पहुंच रहे हैं। यदि किसी जिले से पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है, तो दूसरे जिलों से सब्जियां और फूल मंगाकर मांग पूरी करने की व्यवस्था की जाएगी। परिवहन की योजना भी इसी जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी, ताकि महाकुंभ के दौरान उत्पाद समय पर बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकें।
40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, सब्जियों की मांग बड़ी चुनौती
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सब्जियों की नियमित आपूर्ति महत्वपूर्ण होगी। विभाग की योजना में प्रतिदिन करीब 13 हजार टन सब्जियों की संभावित जरूरत का उल्लेख किया गया है। इस अनुमान के अनुसार, दो महीने के दौरान करीब आठ लाख टन सब्जियों की आवश्यकता पड़ सकती है।