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बाबा की सवारी: पालकी में चंद्रमौलेश्वर तो हाथी पर निकले मनमहेश, जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंजा उज्जैन

Mon, 10 Aug 2026 05:53 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

श्रावण के दूसरे सोमवार बाबा महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। सवारी से पूर्व पूजन-अर्चन और आरती हुई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। जनजातीय नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। रामघाट पर क्षिप्रा जल से पूजन के बाद सवारी मंदिर लौटी।

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पूजन के बाद निकली सवारी
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विस्तार
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श्रावण माह के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। सवारी निकलने से पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के सभामंडप में भगवान श्री महाकालेश्वर का षोडशोपचार पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद आरती संपन्न हुई। पूजन-अर्चन और आरती शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने संपन्न कराई।

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आरती के बाद सभामंडप में भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद अवंतिकानाथ भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश स्वरूप में पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले।

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पालकी के श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वहीं, हाथी पर सवार भगवान मनमहेश के स्वरूप पर पुष्पवर्षा की गई। सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालुओं ने पालकी में विराजित श्री चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर सवार मनमहेश भगवान के भक्तिभाव से दर्शन किए।

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां भगवान महाकालेश्वर चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए मां क्षिप्रा के तट पर पहुंचे। इसके बाद मां क्षिप्रा के जल से पूजन किया गया।

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आकर्षण का केंद्र रहा जनजातीय नृत्य
श्री महाकालेश्वर भगवान की दूसरे सोमवार की सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जनजातीय नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। सवारी को अधिक भव्य रूप देने के लिए प्रत्येक सवारी में अलग-अलग थीम रखी गई है। इसी क्रम में दूसरे सोमवार की सवारी में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए जनजातीय नृत्य दलों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। ये प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।



रामघाट पर श्री चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश के पूजन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस पहुंची। सवारी के आगे घुड़सवार, पुलिस बल और विभिन्न भजन मंडलियां भगवान भोलेनाथ का गुणगान एवं भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे।
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चलित रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
बाबा महाकाल की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा चलित रथ की व्यवस्था की गई। इसके दोनों ओर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए।

सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल पर पुष्पवर्षा कर दर्शन किए। पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद रही। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से के.बी. पंड्या एवं उनके समूह ने आकर्षक रंगोली बनाकर भगवान चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश का स्वागत किया।



भजन मंडलियों में सैकड़ों महिलाओं ने शिव स्तुतियां प्रस्तुत कीं। भजन मंडलियां उत्साहपूर्वक डमरू और मंजीरे बजाते हुए सवारी के आगे चल रही थीं। विशाल ध्वज के साथ बाबा श्री महाकाल की पालकी निकली। संपूर्ण सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री महाकालेश्वर के चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश स्वरूप के दर्शन किए।

 

 

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