प्रदेश के लगभग 60 हजार मंदिरों से जुड़े करीब तीन लाख पुजारी परिवार और 12 लाख सनातन धर्मावलंबी इस मुद्दे से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की भूमि की नीलामी, पुजारियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर समाज में असंतोष है।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुजारियों ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर सरिता लाल को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग की।
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पुजारियों ने सरकार के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें
- गौ माता को राज्य संरक्षित घोषित किया जाए।
- मंदिरों के सरकारीकरण की प्रक्रिया समाप्त की जाए तथा कलेक्टर को प्रबंधक बनाने की व्यवस्था खत्म की जाए।
- मंदिरों की भूमि की नीलामी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- मंदिर समितिकरण की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- मंदिर भूमि के निस्तारीकरण पर रोक लगाई जाए।
- पुजारियों को नामांतरण, कृषक का दर्जा तथा भू-माफिया से सुरक्षा प्रदान की जाए।
- रियासतकालीन अनुबंधों के अनुसार मंदिरों और देव प्रतिमाओं की कथित रूप से हड़पी गई भूमि वापस दिलाई जाए।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे मध्यप्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से फिलहाल ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।