महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी एवं अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पुजारियों के हित में कई काम कर रहे हैं। उन्होंने पुजारियों के मानदेय को बढ़ाकर 5000 कर दिया है। इसके साथ ही मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त करने की घोषणा भी कर चुके हैं जिसके लिए वे साधुवाद के पात्र हैं, लेकिन अखिल भारतीय पुजारी महासंघ को इस बात पर जरूर आपत्ति है कि मंदिरों से लगी जमीन का नीलामी अब पुजारी खुद कर पाएंगे। मुख्यमंत्री को अपना यह फैसला बदलकर इसमें यह सुधार करना चाहिए कि मंदिरों की भूमि की नीलामी कोई नहीं कर सके। जो पुजारी मंदिरों में पूजन पाठ करता है, भगवान की सेवा करता है उसे यह जमीन दे दी जाए।
गौरतलब है कि परशुराम जयंती पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने यह बड़ा ऐलान किया था कि अब मंदिरों से लगी जमीनों की नीलामी कलेक्टर नहीं कर सकेंगे। बल्कि मंदिर से जुड़े पुजारी ही कर पाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा प्रदेश के मंदिरो की जमीनों को लेकर नीलामी करने की बात पर महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी एवं अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने आपत्ति लेते हुए कहा है कि मंदिरों की जमीन की नीलामी का निर्णय बदलना चाहिए। मंदिर की भूमि को नीलाम करने का अधिकार किसी को भी नहीं देना चाहिए। बल्कि इस जमीन को समय-समय पर उन पुजारियों के नाम स्थानांतरित करना चाहिए जो की मंदिर की व्यवस्था को बनाए रखते हैं। आपने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से यह भी आग्रह किया कि मंदिर की भूमि यदि कोई पुजारी बेचता है कोई उसे खरीदता है और अधिकारी वर्ग उसे बेचने में कोई सहयोग करते हैं तो उस पर 7 वर्षों की सजा का प्रावधान होना चाहिए जिससे ना तो इस भूमि को कोई बेच पाएगा और ना ही कोई से खरीदेगा।
पुजारियों से भी की जाए राजस्व की वसूली
पंडित महेश पुजारी ने बताया कि मंदिरों की जमीन जिन पुजारियों को दी जाती है। उनसे प्रति बीघा के हिसाब से राजस्व की वसूली की जाना चाहिए। आपने बताया कि जिस प्रकार लीज पर जमीन दी जाती है उसी तरह पुजारियों से भी कुछ राशि प्रतिवर्ष ली जाना चाहिए जिससे कि शासन को भी राजस्व मैं बढ़ोतरी हो सके।
इसीलिए ना हो मंदिर की जमीन की नीलामी
पंडित महेश पुजारी ने बताया कि मंदिरों की जमीन की भूमि नीलामी इसीलिए नहीं भी होना चाहिए, क्योंकि पुजारियों पर पूर्व में भी इन जमीनों को बेचने के आरोप लगाए गए थे। मंदिरों के साथ उनकी भूमि सदैव होना चाहिए। इसीलिए इन जमीनों की नीलामी का अधिकार किसी के पास नहीं होना चाहिए। जो भी व्यक्ति मंदिरों में पूजन पाठ कर जब तक भगवान की सेवा करेगा। वह इस संपत्ति का स्वामी होगा उसके बाद जिसे यह जिम्मेदारी दी जाएगी वह इस संपत्ति की रक्षा करेगा।