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Ujjain News: विक्रम विवि के विद्यार्थी सीख रहे खेती, एग्रीकल्चर-हॉर्टिकल्चर के छात्र ले रहे प्रैक्टिकल नॉलेज

Sat, 20 Apr 2024 07:32 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

कुलपति प्रो. अखिलेश पांडे ने बताया कि पिछले साल चना लगाया था और इस बार डेढ़ से दो बीघा में मूंग की फसल बोई है। विद्यार्थियों ने गेहूं की फसल से शुरुआत की थी। वहीं, शिक्षकों ने बताया कि हार्टिकल्चर के विद्यार्थी भिंडी, लौकी और अन्य सब्जियां भी उगा चुके हैं।
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विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सीख रहे खेती करना
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विस्तार
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मध्यप्रदेश की उज्जैनीय नगरी लोगों के दिल में बसी हुई है। इसे धार्मिक नगरी के नाम से भी जाना जाता है। अब यह नगरी कृषि के क्षेत्र में भी आगे बढ़ती जा रही है। विक्रम विश्वविद्यालय एक ऐसा विद्यालय है इसमें दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते हैं। विक्रम विश्वविद्यालय अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को खेती भी सीखा रहा है। विद्यार्थी बुआई से लेकर फसल लहलहाने तक उसकी देखभाल खुद कर रहे हैं। ये सब पढ़ाई के साथ किया जा रहा है, ताकि एग्रीकल्चर व हॉर्टिकल्चर के विद्यार्थियों को सिर्फ थ्योरिकल ही नहीं, बल्कि प्रेक्टिकल नॉलेज भी ऐसा हो कि शिक्षित होने के साथ ही खेती का आधुनिक अनुभव होने से फायदे-नुकसान को ध्यान में रखते हुए फसलों की अच्छे से देखभाल और अधिक पैदावार में दक्ष बन सके। इसलिए विक्रम विश्वविद्यालय छात्रों को इसे अच्छे से समझा रहा है।
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कुलपति प्रो. अखिलेश पांडे ने बताया कि पिछले साल चना लगाया था और इस बार डेढ़ से दो बीघा में मूंग की फसल बोई है। विद्यार्थियों ने गेहूं की फसल से शुरुआत की थी। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के हेड डॉ. राजेश टेलर, मोनू विश्वकर्मा, रीना परमार, विकास खत्री विद्यार्थियों को खेती के लिए मार्गदर्शित कर रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि हार्टिकल्चर के विद्यार्थी भिंडी, लौकी व अन्य सब्जियां भी उगा चुके हैं।

विद्यार्थियों को ग्रुप में बांटा गया 
विक्रम विश्वविद्यालय फसले कैसे उगाते हैं, कैसे उनका रखरखाव करते है। यह सब इसमें अहम भूमिका है। विक्रम विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट शुरू हुए तीन वर्ष हो चुके हैं, कुछ समय पहले देशभर के कृषि विषय के 850 विद्यार्थी विक्रम में अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय द्वारा 15-15 विद्यार्थियों के ग्रुप बनाए गए हैं और 10 बाय 10 के खेत एक-एक ग्रुप को बोवनी से लेकर पानी देने तक की देखभाल के लिए दिए हैं। इसके पीछे उद्देश्य यही है कि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ खेती को लेकर ये सीख सकें कि कब बीज बोना है, कब-कब पानी देना, किस तरफ फसल की देखभाल करना है और फसल को कीटनाशक से बचाना है तो कीटनाशक की मात्रा कितनी हो यह विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल सीखने को मिल रहा है।
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विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिले यही उदेश्य
विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए तमाम प्रयास किया जा रहे हैं। इस बार विद्यार्थियों को बड़े-बड़े किसानों के पास में पहुंचाकर उन्हें खेती के गुण भी सीखा रहे हैं। ताकि, वे कृषि कार्य में वे इतने दक्ष हो कि कौन सी फसल कितनी फायदेमंद होगी, ये सब पता उनको रहे। भविष्य में बेहतर व आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में ये विद्यार्थी अहम भूमिका निभा सकेंगे। इसलिए इन विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल भी कराया जा रहा है।
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विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सीख रहे खेती करना

 

विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सीख रहे खेती करना

 

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