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Ujjain News: चैत्र नवरात्र का दशहरा आज, उज्जैन के गांव में हुआ रावण का पूजन, मन्नत लेकर दूरदराज से पहुंचे लोग

Thu, 18 Apr 2024 01:24 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के गांव चिकली में रावण का मंदिर बना है। चैत्र नवरात्रि के दशहरे पर आज रावण दहन नहीं बल्कि पूजन के लिए दूरदराज से लोग चिकली गांव में पहुंचे।  

नवरात्री का दशहरा आज....रावण का दहन नही बल्कि हुआ पूजनगाँव चिकली मे बना है रावण का मंदिर, मन्नत मांगने दूर दूर से आए भक्त
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उज्जैन जिले में लंकेश की पूजा होती है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उज्जैन जिले के बड़नगर रोड पर ग्राम चिकली मे चैत्र माह की नवरात्र के बाद दशहरे पर रावण के पूजन की अनोखी परंपरा है। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकत्रित होकर लंकेश का पूजन किया। गांव वालों का मानना है कि पूजा की यह परंपरा नई नहीं, बल्कि सदियों पुरानी है। कोई नहीं जानता कि रावण का मंदिर कब और किसने बनवाया लेकिन गांव के वरिष्ठजन पूजा-अर्चना करते रहे हैं और इस परंपरा का निर्वहन आज भी जारी है। दशहरे के अवसर पर आसपास के गांव के लोग लंकेश की पूजा अर्चना के लिए मन्नत लेकर पहुंचे।  

 

राजस्थान-गुजरात से भी मुराद लेकर आते हैं लोग 

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चिकली गांव के वीरेंद्र ने बताया कि हमारे पूर्वज भी रावण की पूजा करते थे। हमने अपने पूर्वजों को रावण की पूजा करते देखा है। आज भी यह परंपरा जारी है। गांव के ही केसर सिंह ने बताया कि एक बार लोग रावण की पूजा करना भूल गए थे, तब गांव में भीषण आग लग गई थी। इससे काफी नुकसान भी हुआ था। इसके बाद हमेशा से दशहरा पर रावण की पूजा का विधान है। दूर-दूर के कई लोग भी मुराद लेकर भी रावण पूजन में भाग लेते हैं। रावण का मंदिर कई साल पुराना था, जिसे दो साल पहले गांव वालों ने पांच लाख रुपये जोड़कर नया स्वरूप दिया है। इस मंदिर में गुजरात, राजस्थान के लोग भी दर्शन के लिए पंहुचते हैं। मुस्लिम समाज की भी भागीदारी रहती है। 

दो सौ साल पुराना है दशानन का मंदिर

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दो सौ साल पुराने इस मंदिर में लोग मन्नत मांगते हैं, जो पूरी होने पर यहां नारियल चढ़ाने जरूर आते हैं। दशहरे पर्व पर एक ओर जहां जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, वहीं दूसरी ओर बड़नगर तहसील के गांव चिकली में रावण दहन नहीं होता। यहां उनकी पूजा होती है। लोग मन्नत भी मांगते हैं।

 

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रात्रि में निकलती है सवारी
ग्रामीण चैत्र मास में आने वाले दशहरा पर्व को बड़ी धूमधाम से मनते हैं। मेला लगता है। रात्रि में ग्रामीण गांव के प्रमुख मार्गों से भगवान राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान की सवारी निकालते हैं। 

 

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