उज्जैन पुलिस अधीक्षक को गुमनाम व्यक्ति द्वारा एक लिखित शिकायत की गई थी कि उज्जैन शहर में एक व्यक्ति नकली प्रमाण पत्र और फर्जी आदेश लेकर नौकरी दिलवाता है। उसकी एवज में 25 से 30 हजार रुपये भी लेता है। अभी उसने एक व्यक्ति को माकडोन के अस्पताल में जाली प्रमाण पत्र और जाली आदेश लेकर नौकरी पर लगाया है।
पुलिस अधीक्षक उज्जैन ने आवेदन जांच के लिए सीटीसीआईडी उज्जैन को भेजा था। इसकी उनके द्वारा जांच की गई थी। उसके बाद कार्यालय अपराध अनुसंधान शाखा उज्जैन द्वारा शिकायत आवेदन की जांच की गई थी। इसकी जांच रिपोर्ट 29/9/95 को दी गई। जांच में यह तथ्य आया कि साल 1994-95 में गैस राहत त्रासदी के अतिशेष कर्मचारियों को सर्वेलेंस वर्कर/बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी उज्जैन द्वारा कुछ नियुक्तियां दी गई हैं।
तथ्य की पुष्टि के लिए संचालक गैस राहत और त्रासदी भोपाल एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी गैस त्रासदी भोपाल को पत्र लिखकर जानकारी चाही गई तो दोनों ही कार्यालय से रिपोर्ट प्राप्त हुई कि उनके कार्यालय से कोई भी अतिशेष कर्मचारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी उज्जैन के अधीन पदस्थ नहीं किया गया है और न ही पत्र में लेख नाम के कर्मचारी उनके अधीन कार्यरत हैं। हरिशरण, हरिशंकर, राजेन्द्र कुमार, संतोष कुमार, राकेश कुमार, अरूण कुमार गंगेले, कैलाश अरजरिया, रमेश कुमार नामदेव, अमर सिंह, राजेश कुमार और संतोश कुमार रावत ने फर्जी आदेश पर नियुक्तियां प्राप्त की थी। 23/12/97 को आरोपीगण के खिलाफ कोतवाली में अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
संतोष प्रसाद शुक्ला और अपर सत्र न्यायाधीश महोदय उज्जैन के न्यायालय द्वारा आरोपीगण हरिशरण, हरिशंकर, राजेन्द्र कुमार, संतोष कुमार, राकेश कुमार, अरूण कुमार गंगेले, कैलाश अरजरिया, रमेश कुमार नामदेव, अमर सिंह, राजेश कुमार और संतोष कुमार रावत को धारा 120-बी, 420 एवं 471 भादवि में तीन-तीन साल सश्रम कारावास और कुल 38,500 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।