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Ujjain: सहस्त्रचंडी नवकुंडीय यज्ञ में 1100 कमल पुष्पों से देवी को किया सहस्त्रार्चन, वडोदरा से मंगाए गए थे फूल

Thu, 11 Jan 2024 04:05 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन

सार

श्री गुरु पंचामृत द्वादश पुष्प अमृत महोत्सव में सहस्त्र चंडी नवकुंडीय यज्ञ में 1100 कमल के पुष्पों से देवी प्रसन्नता के लिए आहुति दी गई। यज्ञाचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास के आचार्यत्व में देवी प्रतिमा और श्री यंत्र पर 1100 कमल पुष्पों से देवी का सहस्त्रार्चन कर विश्व मंगल की कामना की।
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यज्ञ में 1100 कमल के पुष्पों से देवी प्रसन्नता के लिए आहुति दी गई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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श्री राम जानकी मंदिर खाकी अखाड़ा मंगलनाथ रोड़ खाक चौक पर श्री गुरु पंचामृत द्वादश पुष्प अमृत महोत्सव में सहस्त्र चंडी नवकुंडीय यज्ञ में 1100 कमल के पुष्पों से देवी प्रसन्नता के लिए आहुति दी गई। यज्ञाचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास के आचार्यत्व में देवी प्रतिमा और श्री यंत्र पर 1100 कमल पुष्पों से देवी का सहस्त्रार्चन कर विश्व मंगल की कामना की। अखाड़े के श्रीमहंत अर्जुनदास महाराज द्वारा माता का अर्चन किया गया। सहस्त्रार्चन के लिए गुजरात के वडोदरा से विशेष कमल पुष्प मंगाए गए।
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पं. चंदन व्यास के अनुसार यज्ञ मंडप को सर्वप्रथम केल और आम के पत्तों से सजाया गया। तत्पश्चात देवी प्रतिमा विराजित कर कमल पुष्पों से अर्चन किया गया। खाकी अखाड़े के श्रीमहंत अर्जुन दास महाराज ने बताया कि महोत्सव में चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में षष्ठम दिवस नंदोत्सव मनाया गया। माखनचोरी की लीला का वर्णन किया वहीं गोवर्धन पूजा कर छप्पन भोग लगाए गए। श्री गुरु पंचामृत द्वादश पुष्प अमृत महोत्सव में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ, श्रीरामार्चन महायज्ञ (पूजन), श्री सहस्त्रचंडी नवकुंडीय महायज्ञ, श्री नवकुंडात्मक नवदिवसीय श्री सहस्त्रचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।

श्रीमद् भागवत कथा में हुआ श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन
आचार्य डॉ. रामानंददास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि दास दासियां सैकड़ों हैं, लेकिन मां यशोदा रोज ताजा मक्खन अपने हाथ से निकालती हैं, कहती हैं अपने लाला की सेवा मैं अपने हाथ से करूंगी। बासी माखन रखा है घर में लेकिन मां लाला के लिए ताजा माखन निकालती है। और आजकल की माताएं सुबह का खाना शाम तक देती हैं, बिना नहाए धोए, बिना मुंह धोए खाना बना देती हैं और सोचती हैं संतान प्रोफेसर, आईएस, आईपीएस बने, उच्च विचार आएं संस्कारवान हो, जब स्वयं के न अचार न विचार ऐसा खाना खिलाओगी तो संस्कार कहां से लाओगी। 
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