फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ujjain News: हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास, रिश्वतखोर चपरासी को चार साल की सजा

Fri, 14 Nov 2025 08:24 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

पहले मामले में तराना के ग्राम बिसनखेड़ी में 2022 में हुए विवाद में राधेश्याम की हत्या करने वाले आरोपी कैलाश को अपर सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दूसरे मामले में रिश्वत मांगने वाले चपरासी को स्पेशल कोर्ट ने चार वर्ष की कैद और 8000 रुपये अर्थदंड की सजा दी। 
विज्ञापन
उज्जैन न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिले में आज दो महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले सुनाए गए हैं। एक मामले में तराना के हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास मिला है। वहीं, दूसरे मामले में रजिस्ट्री कार्यालय के एक चपरासी को रिश्वत लेने पर चार साल की जेल की सजा सुनाई गई है।
विज्ञापन


तराना के ग्राम बिसनखेड़ी में 8 सितंबर 2022 को राधेश्याम के साथ मामूली विवाद के चलते आरोपी कैलाश पिता बाबूलाल (41) ने जान से मारने की नीयत से पत्थर से सिर पर चोट पहुंचाकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इलाज के दौरान घायल राधेश्याम की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 302 (हत्या) का इजाफा किया। 12 नवंबर को अपर सत्र न्यायालय प्रेमा साहू ने आरोपी कैलाश को आजीवन कारावास से दंडित किया गया। मामले में पुलिस निरीक्षक भीम सिंह पटेल और सहायक उपनिरीक्षक रमेश सेन ने अनुसंधान किया।

वहीं चार साल पहले रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति के लिए चार हजार की रिश्वत मांगने वाले पंजीयक कार्यालय के चपरासी को कोर्ट ने चार साल की सजा सुनाई है। उस पर 8 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला 8 अप्रैल 2021का है। तराना के रहने वाले शैलेंद्रङ्क्षसह पंवार ने लोकायुक्त उज्जैन में पंजीयक कार्यालय उज्जैन के चपरासी नारायणसिंह की रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। इसके अनुसार पंवार के चाचा कमलसिंह पंवार को बैंक लोन के लिए रजिस्ट्री की सत्यापित प्रतिलिपि की जरूरत थी। चूंकि उनके चाचा ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है, ऐसे में उन्होंने रजिस्ट्री निकालने का काम शैलेंद्र को सौंपा था।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- जल्द शुरू होंगी MP में राजनीतिक नियुक्तियां! प्रदेश अध्यक्ष ने बताया क्या हुई चर्चा
विज्ञापन


शैलेंद्र इसके लिए उज्जैन स्थित पंजीयन कार्यालय गए तो यहां पदस्थ चपरासी नारायणसिंह ने 4 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। आखिर में मामला 3 हजार रुपये में तय हुआ। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त की टीप ने डीएसपी वेदांत शर्मा के नेतृत्व में कार्रवाई की और शैलेंद्र को तीन हजार रुपए की राशि का लिफाफा देकर नारायणङ्क्षसह के पास भेजा। उसने राशि लेकर आलमारी में छिपा दी। लोकायुक्त की टीम ने यह राशि बरामद की और नारायण सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में चालान स्पेशल कोर्ट में पेश किया। स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाते हुए चार साल की सजा और 8 हजार रुपए का अर्थदंड किया है। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक मनोजकुमार पाठक ने की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें