उज्जैन स्थित केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में इन दिनों तीन ऐसे कैदी बंद हैं, जिन्हें अदालत द्वारा संगीन अपराधों में दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से एक कैदी उज्जैन का निवासी है। तीनों कैदियों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपील दायर कर रखी है, लेकिन फिलहाल उनकी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है।
भैरवगढ़ जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि जेल में बंद इन तीनों कैदियों को अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई है, लेकिन अभी तक फांसी की तिथि निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में तीनों कैदी फांसी की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद कैदी अक्सर गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में चले जाते हैं। इसी कारण जेल प्रशासन द्वारा उनकी प्रतिदिन विशेष निगरानी की जाती है, ताकि वे कोई आत्मघाती कदम न उठा सकें। जेल प्रहरियों को भी इन कैदियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जेल प्रशासन द्वारा ऐसे कैदियों को यह भी बताया जाता है कि अदालत के निर्णय के बाद भी उनके पास अपील के कानूनी विकल्प मौजूद रहते हैं। फांसी की तारीख तय होने की स्थिति में संबंधित कैदी को जबलपुर केंद्रीय जेल भेजा जाता है, जहां मृत्युदंड की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
जेल अधीक्षक मनोज साहू के अनुसार, भैरवगढ़ जेल में बंद मृत्युदंड पाए कैदियों में अब्दुल वाहिद उर्फ लाला (पत्नी की हत्या का मामला), गोलू उर्फ नरेंद्र (कुकृत्य व हत्या का मामला) और वारिस खान पिता नहर खान (दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के तहत मामला) शामिल हैं। तीनों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है और अब फांसी की तारीख का इंतजार है।
दो कैदियों की सजा आजीवन कारावास में बदली
परिजनों से मिलने की दी जाती है रियायत
जेल प्रशासन के अनुसार, फांसी की सजा पाए कैदियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है। उन्हें परिजनों से मिलने की रियायत दी जाती है और जेल में बंद अन्य कैदियों की तरह सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के बारे में समझाया जाता है कि मृत्युदंड अंतिम विकल्प है और कानूनी रास्ते अभी शेष हो सकते हैं।
प्रदेश में आखिरी फांसी वर्ष 1997 में दी गई थी