सार
उज्जैन में शक्कर की कीमतों में एक महीने के भीतर 8 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमजोर मानसून, अल नीनो के असर, महाराष्ट्र की चीनी मिलों से कम आपूर्ति, जमाखोरी और सट्टेबाजी को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। खुदरा बाजार में शक्कर 51 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
उज्जैन संभाग में मौसम की बेरुखी और अल नीनो (El Niño) के असर की आशंका के बीच मीठी शक्कर के भाव कड़वे हो गए हैं। बीते एक महीने में शक्कर की खुदरा कीमतों में 8 रुपये प्रति किलो की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शनिवार को बाजार में शक्कर 51 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकती रही।
इस सीजन में कमजोर मानसून के कारण महाराष्ट्र की प्रमुख चीनी मिलों से शक्कर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। आपूर्ति घटने के साथ ही बाजार में बड़े स्टॉकहोल्डर्स (जमाखोरों) की खरीद बढ़ गई है। इसका असर कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। थोक बाजार में जो शक्कर पहले 4,200 से 4,250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, वह एक महीने में बढ़कर करीब 5,000 रुपये प्रति क्विंटल (करीब 50 रुपये प्रति किलो) तक पहुंच गई है। वहीं, खुदरा बाजार में शक्कर 51 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
क्या बोले मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष?
दौलतगंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय रोहरा ने बताया कि शक्कर के कारोबार के इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है, जब महज एक महीने के भीतर कीमतों में 8 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि मानसून की बेरुखी और सूखे की आशंका के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।
जानकारों के अनुसार, उज्जैन शहर और आसपास के क्षेत्रों में शक्कर की अनुमानित दैनिक खपत 4,000 क्विंटल से अधिक है। इसमें मिठाइयों और शक्कर से बनने वाले अन्य खाद्य उत्पादों की खपत भी शामिल है। बाजार में आई इस अचानक तेजी का फायदा उठाने के लिए सट्टेबाज भी सक्रिय हो गए हैं और तेजी का माहौल बनाकर कीमतों को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
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क्यों महंगी हुई शक्कर?
- मौसम की मार: अल नीनो और कमजोर मानसून के कारण महाराष्ट्र की चीनी मिलों से आपूर्ति प्रभावित।
- जमाखोरी: बड़े स्टॉकहोल्डर्स की भारी खरीद से बाजार में उपलब्धता कम हुई।
- सट्टेबाजी: तेजी की उम्मीद में सट्टेबाजों की सक्रियता से कीमतों को और बढ़ावा मिला।
आम जनता पर असर
- पहले 10 किलो शक्कर की कीमत: 430 रुपये
- अब 10 किलो शक्कर की कीमत: 510 रुपये
यानी हर 10 किलो शक्कर पर उपभोक्ताओं को सीधे 80 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।