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काम रुका, फाइलें बंद: उज्जैन के पटवारियों ने शुरू की कलमबंद हड़ताल, कहा- जनता की परेशानी की जिम्मेदारी शासन की

Wed, 05 Aug 2026 05:49 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन में मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने पांच सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। पटवारियों ने तहसील कार्यालय में बैग और दस्तावेज जमा कर काम बंद किया। संघ कैडर रिव्यू, पदोन्नति, विभागीय परीक्षा, प्रोटेक्शन एक्ट और लंबित मानदेय भुगतान सहित मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेगा। 

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ऐसे हो रहा विरोध.....
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विस्तार
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मध्य प्रदेश पटवारी संघ के भोपाल स्थित प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर उज्जैन जिले के पटवारियों ने पांच सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के तहत जिले के सभी पटवारियों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर सामूहिक रूप से अपने बैग और दस्तावेज जमा कर दिए।

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मध्यप्रदेश पटवारी संघ के संभागीय अध्यक्ष आशीष कुमावत और जिलाध्यक्ष भगवानसिंह यादव ने बताया कि पटवारी संवर्ग की विभिन्न मांगें पिछले लगभग 25 वर्षों से लंबित हैं। कई बार शासन के समक्ष मांगें रखने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के चलते पटवारियों को चरणबद्ध आंदोलन के बाद यह फैसला लेना पड़ा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान नहीं होता है तो आगामी योजनाओं के कार्यों का भी बहिष्कार किया जाएगा। पटवारी संघ ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के कारण किसानों और आमजन को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

हड़ताल के दौरान अब तक यह हुआ

  • 20 जुलाई से काली पट्टी बांधकर कार्य।

  • 24 से 27 जुलाई तक सभी शासकीय दस्तावेज एवं अन्य औपचारिक समग्र का बहिष्कार।

  • 28 जुलाई से 2 अगस्त तक समस्त ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार।

  • 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल प्रारंभ।

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यह है पटवारियों की 5 मुख्य मांगें

  • कैडर रिव्यू का लाभ - वर्षों से लंबित कैडर रिव्यू प्रस्ताव को तत्काल लागू किया जाए।

  • पदोन्नति और वेतनमान -  तृतीय एवं चतुर्थ पटवारियों को पदोन्नति का लाभ और वंचित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान दिया जाए।

  • विभागीय परीक्षा - वर्ष 2018 के बाद आयोजित नहीं हुई परीक्षा शीघ्र आयोजित कर विभागीय नियुक्ति के आधार पर सिलेक्शन तय किया जाए।

  • राजस्व न्यायालयीन प्रकरण - राजस्व न्यायालयीन मामलों में पटवारी केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है, जबकि निर्णय तहसीलदार व नायब तहसीलदार द्वारा लिया जाता है। इसके बावजूद पटवारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होती है। इसलिए उन्हें भी प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में शामिल किया जाए।

  • मानदेय भुगतान- स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना, फार्मर आईडी शिविर सहित विभिन्न योजनाओं में पटवारियों द्वारा किए गए कार्यों का वर्षों से लंबित मानदेय शीघ्र भुगतान किया जाए।

 

 

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