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उज्जैन: 11 मंदिरों से ₹800 करोड़ जुटाने की तैयारी, संस्कृत विद्वान समर्थन में तो कांग्रेस क्यों कर रही विरोध?

Sat, 24 Oct 2026 05:55 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के 11 प्रमुख मंदिरों के विकास के लिए 600 करोड़ रुपये का कर्ज और 200 करोड़ के टेंपल बॉन्ड जारी करने की योजना पर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस नेता भरत पोरवाल और पुजारी महासंघ ने इसका विरोध किया, जबकि संस्कृत विद्वान राजेश्वर शास्त्री मुसलगावकर ने इसे जनभागीदारी बढ़ाने वाला कदम बताया। 
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उज्जैन में टेंपल बॉन्ड को लेकर सियासत होने लगी है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धार्मिक नगरी उज्जैन के 11 प्रमुख मंदिरों के सौंदर्यीकरण और उन्नयन के लिए 600 करोड़ का कर्ज और 200 करोड़ के टेंपल बॉन्ड जारी करने की योजना पर सियासी घमासान मच गया है। पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने इस योजना को गलत बताते हुए अधिकारियों के जेल जाने तक की बात कह दी है, तो वहीं विक्रम विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्वान ने इस योजना का खुलकर समर्थन किया है।

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कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने कहा कि सिंहस्थ के बजट से भी इन 11 मंदिरों का विकास हो सकता था, लेकिन उन्हें गिरवी रखकर 600 करोड़ का कर्ज और 200 करोड़ का बॉन्ड निकालना गलत है। इसके जरिए बिजनेस किया जा रहा है। पोरवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सभी समितियों के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं, इसलिए शासकीय भूमि कलेक्टर के अधीन आती है। कलेक्टर को सरकारी जमीन गिरवी रखने का कोई अधिकार नहीं है। इसके लिए पहले सेबी से परमिशन लेना होती है। कोई भी सरकारी बैंक सरकारी जमीन पर लोन नहीं देती, फिर इतनी बड़ी राशि का लोन कैसे दिया जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी है कि सीधी सी बात है, जो अधिकारी गलत नियम लगाकर इस योजना को पूरा करने में लगे हैं, वे जरूर जेल जाएंगे। अगर 800 करोड़ का कर्ज-बॉन्ड लिया जाएगा तो यह राशि आखिरकार मंदिरों में आने वाले भक्तों से ही वसूली जाएगी। पोरवाल ने कहा कि उज्जैन विकास प्राधिकरण के अधिकारी मनमाफिक काम कर रहे हैं। अगर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलते तो वे 500 करोड़ मंदिरों के विकास के लिए आसानी से दे देते। जब अयोध्या में राम मंदिर चंदे से बन सकता है, तो उज्जैन में बॉन्ड क्यों? अगर जरूरत है तो मैं खुद 11,000 रुपये की पहली रसीद कटवाने को तैयार हूं। मंदिरों को गिरवी रखने से सनातन बंधुओं की आत्मा को ठेस पहुंच रही है।

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दूसरी ओर विक्रम विश्वविद्यालय की संस्कृत अध्ययनशाला के राजेश्वर शास्त्री मुसलगावकर ने इस योजना को कारगर बताया है। उन्होंने कहा जन सामान्य को मंदिरों की ओर लाने हेतु यह योजना कारगर साबित होगी, हमें इसका स्वागत करना चाहिए। जनता का इन्वेस्टमेंट मंदिरों में होने से लोगों का रुझान बढ़ना अच्छी बात है। इससे जनता की भागीदारी होगी और अच्छा लाभांश भी मिलेगा। बॉन्ड खरीदने से मंदिरों के मालिक बनने वाली बात को उन्होंने गलत सोच बताया। उन्होंने कहा, बॉन्ड खरीदने से कोई मंदिरों का मालिक हो जाएगा, ऐसा नहीं माना जा सकता। शासन का पैसा धर्म में खर्च हो, यह अच्छा नहीं है। इसके लिए जनता का पैसा ही खर्च होना चाहिए। विपक्ष का काम है कहना, लेकिन यह योजना काफी अच्छी है।
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धर्म स्थलों के बांड जारी करना गलत - पं शर्मा
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के संस्थापक पंडित महेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में सनातन धर्म की सरकार है इसके बावजूद भी धर्मस्थल को पर्यटक स्थल बनाया जा रहा है। मंदिरों के शेयर बांड जारी करने की योजनाएं बन रही है। उन्होंने बताया कि मंदिर पूजन अर्चन का स्थान है लेकिन यहां पर मंदिरों के शेयर बांड निकालना गलत है। अगर शेयर बांड करने वाले लोगों की नीयत बिगड़ती है तो फिर जिनके पास यह बांड अधिक होंगे, वह मंदिरों पर कब्जा कर सकते हैं। मंदिरों पर आधिपत्य जमा सकते हैं इसीलिए हमारी तो सरकार से यही विनती है कि वह इस योजना पर एक बार और ध्यान दें। धर्मस्थलों को व्यापार से जोड़ने से कहीं ना कहीं इसका विपरीत असर होगा। इससे सनातन धर्म समाप्त होगा और यह क्षेत्र व्यावसायिक क्षेत्र बन जाएंगे।

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