३५० करोड़ के महाकाल लोक की व्यवस्था ने भीड़ के आगे घुटने टेक दिये। गुड फ्राइडे, राम नवमी, विकेंड की छुट्टियां प्लान कर देशभर के कई हिस्सों से पर्यटक उज्जैन पहुंच रहे है, लेकिन उन्हे महाकाल लोक के बजाए गेट पर बड़ा ताला देखने को मिल रहा है। जिस महाकाल लोक को लोकार्पण के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलौकिक बताया। देशवासियों से उसे देखने का आग्रह किया अौर जब भीड़ जुटी तो अफसरों ने उसी लोक पर ताले डाल दिए। वजह बताई जा रही है कि उज्जैन में प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही है, इसलिए लोक में लोग नहीं घुम सकते है।
महाकाल लोक में लोगों को नहीं जाने देने के मुद्दे पर मंदिर प्रशासक संदीप सोनी से सीधी बात की। उन्होंने यह जवाब दिए।
-मंदिर की दर्शन व्यवस्था क्यों बदली?
-४ अप्रैल से प्रदीप मिश्रा की कथा प्रारंभ हुई है। उसमें बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद जताई गई थी। पुलिस प्रशासन ने योजना बनाई थी कि लोगों को लाइन में ही लेकर आए और लाइन के द्वारा ही दर्शन के बाद मंदिर के बाहर भेजे, ताकि समस्या का सामना नहीं करना पड़े।
-हमने दर्शन के लिए एक मार्ग बनाया गया। जो चारधाम से शुरु होता है। यहां से रुद्र सागर, त्रिवेणी,महाकाल लोक, मानसरोवर से मंदिर के दर्शन कराए जा रहे है। इस रुट पर टेंट, सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। लोग ३० से ३५ मिनट में मंदिर के दर्शन कर पा रहे है।
महाकाल लोक क्यों बंद किया गया?
इस व्यवस्था में लोग त्रिवेणी के बाद महाकाल लोक से ही मंदिर में आ रहे है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि महाकाल लोक बंद है। बस भक्त कतार तोड़कर इधर-उधर नहीं जा सकते है।