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Ujjain: मुहर्रम जुलूस कार ब्लास्ट केस की कोर्ट में सुनवाई, सरकार का जवाब- धमाका नहीं, पटाखों की आतिशबाजी थी

Sat, 18 Jul 2026 01:39 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के बड़नगर में  मुहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से हवा में लटकाई गई कार में हुए धमाकों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि कार में विस्फोट नहीं, बल्कि पटाखों की आतिशबाजी की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने एनआईए जांच की मांग खारिज कर दी।
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मोहर्रम जुलूस कार ब्लास्ट केस की कोर्ट में सुनवाई
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विस्तार
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उज्जैन में 23 जून की रात मुहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से कार को हवा में उठाकर उसमें पटाखों की आतिशबाजी करने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि उज्जैन के बड़नगर में  मुहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से कार को हवा में उठाकर उसमें किए गए धमाके वास्तव में सिर्फ पटाखों की आतिशबाजी थे।

इन धमाकों को सुनियोजित साजिश और देशद्रोह जैसी गतिविधि बताते हुए हिंदू जागरण मंच की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने कार में हुए धमाकों को पटाखों की आतिशबाजी बताया। इसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग को खारिज कर दिया।

हिंदू जागरण मंच ने एनआईए जांच की मांग की थी

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हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि 23 जून को बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान ताजियों के साथ चल रही कार में विस्फोट किया गया, जो विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध है। याचिका में तर्क दिया गया कि यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के तहत जांच योग्य है, इसलिए इसकी जांच एनआईए से कराई जानी चाहिए। साथ ही, मोहर्रम जुलूस के लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की भी मांग की गई।

सरकार ने कहा- एनआईए जांच की आवश्यकता नहीं
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि कार से मिले साक्ष्यों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। सरकार ने गिरफ्तार आरोपियों के बयान भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। आरोपियों ने बताया कि दो अखाड़ों के बीच करतब दिखाने की होड़ थी। इसी के चलते क्रेन से हवा में उठाई गई कार में मामूली पटाखे रखकर जलाए गए थे। उस समय कार में दो लोग भी मौजूद थे, जिन्हें कोई चोट नहीं आई। इससे स्पष्ट है कि कार में कोई विस्फोट नहीं हुआ, बल्कि केवल आतिशबाजी की गई थी।

अब चार सप्ताह बाद होगी सुनवाई

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार के अनुसार, मुहर्रम के दौरान कार में विस्फोटक नहीं, बल्कि पटाखों का उपयोग किया गया था। हालांकि, इसकी एफएसएल रिपोर्ट अभी आना बाकी है। चूंकि जांच एजेंसी के अनुसार यह एक व्यक्ति द्वारा किया गया स्टंट था और वाहन में पहले से ही लोग बैठे हुए थे, इसलिए इस मामले की जांच एनआईए से कराने की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दों पर राज्य सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

'ले फिर आ गए' लिखी कार बनी प्रदर्शन का केंद्र
वीडियो में जिस कार का उपयोग किया गया, उस पर बड़े अक्षरों में 'ले फिर आ गए' लिखा हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों युवकों ने अपने चेहरे कपड़े से ढंक रखे थे। पूरे प्रदर्शन के दौरान वाहन क्रेन से हवा में लटका रहा। यदि क्रेन में तकनीकी खराबी आती या वाहन का संतुलन बिगड़ जाता, तो भीड़ के बीच बड़ा हादसा हो सकता था।

अनुमति जुलूस की थी, खतरनाक करतब और आतिशबाजी की नहीं
पुलिस के अनुसार मोहर्रम जुलूस निकालने की वैधानिक अनुमति दी गई थी, लेकिन वाहन को हवा में लटकाकर इस तरह का प्रदर्शन करने या पटाखों की आतिशबाजी करने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन का कहना है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में इस प्रकार का प्रदर्शन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता था।

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मोहर्रम जुलूस के दौरान कार ब्लास्ट की तस्वीर।

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