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एमपी में हद हो गई: दो साल से जेल में बंद शिक्षक का नाम ट्रेनिंग सूची में, बीईओ के हस्ताक्षर से खुली पोल; जानें

Sat, 18 Jul 2026 01:37 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

Chhindwara: ये मामला ऐसे समय में सामने आया जब बीईओ कार्यालय ने संकुल लहगड़ुआ में आयोजित सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची जारी की। इस सूची में चौथे क्रम पर उस शिक्षक का नाम शामिल है जो पिछले दो वर्षों से जेल में बंद है। पढ़ें पूरा मामला। 

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तामिया स्कूल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छिंदवाड़ा के तामिया का संदीपनी विद्यालय और विकासखंड शिक्षा कार्यालय एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बीईओ कार्यालय द्वारा जारी सिकल सेल प्रशिक्षण आदेश में पिछले दो वर्षों से जेल में बंद एक शिक्षक की भी ड्यूटी लगा दी गई। आदेश सामने आते ही पूरे शिक्षा महकमे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

कैसे उजागर हुआ मामला?

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जानकारी के अनुसार, बीईओ कार्यालय ने संकुल लहगड़ुआ में आयोजित सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची जारी की। इस सूची में चौथे क्रम पर उस शिक्षक का नाम शामिल है, जो 43 लाख रुपये के चर्चित वित्तीय अनियमितता मामले में पिछले दो वर्षों से जेल में बंद है। हैरानी की बात यह है कि आदेश पर बीईओ के हस्ताक्षर भी हैं और सभी शिक्षकों को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि यही संदीपनी विद्यालय हाल ही में एक दिन की अवधि वाला प्राचार्य पद का विज्ञापन जारी होने के कारण भी चर्चा में रहा था। अब इस नए मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक और कर्मचारी भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर जेल में बंद कर्मचारी का नाम प्रशिक्षण सूची में कैसे शामिल हो गया।

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43 लाख रुपये के घोटाले से जुड़ा है मामला

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उल्लेखनीय है कि तामिया विकासखंड में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 43 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। कोषालय जांच में सरकारी राशि निजी खातों में स्थानांतरित किए जाने का खुलासा हुआ था। तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर एक अधिकारी, एक सेवानिवृत्त कर्मचारी, दो बाबुओं सहित कुल छह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले के मुख्य आरोपी हरिप्रसाद पंद्रे को निलंबित कर दिया गया था और वह वर्तमान में जेल में बंद है। आरोपियों से 43 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई भी की गई थी।

बीईओ ने दी सफाई
मामले में बीईओ बी.के. सानेर ने कहा कि प्रशिक्षण के लिए जारी सूची उनके कार्यालय ने तैयार नहीं की है। उनके अनुसार यह सूची सिकल सेल विभाग की ओर से भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि सूची की जांच कराई जा रही है और यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसे तत्काल सुधार दिया जाएगा। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि बिना सत्यापन के सूची पर हस्ताक्षर कर आदेश कैसे जारी कर दिया गया। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

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