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MP News: CM यादव बोले- अध्यात्मिकता की यात्रा ही भारत की विकास यात्रा, पूरी सृष्टि में विद्यमान है परमेश्वर

Sun, 11 Feb 2024 08:33 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के विमर्श कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अध्यात्मिकता की यात्रा ही भारत की विकास यात्रा है। 
 
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डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में अध्यात्मिकता पर अपनी बातें रखी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हे भारत आध्यात्मिकता से विश्व विजयी बनो। यह विमर्श हमारा मूल दृष्टिकोण है। हम मूलत: आध्यात्मिक हैं। हमारा मूल दृष्टिकोण आध्यात्मिक है। सम्पूर्ण प्रकृति में परमेश्वर निहित है। उसे बस आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। उक्त विचार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माधव सेवा न्यास में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी मध्य प्रान्त के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। 

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे इतिहास में हमारा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान समाहित है। कुंभ का मेला नक्षत्र के अनुसार होता है। प्रत्येक बारह वर्ष में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन किया जाता है। बाकी जगह आयोजित होने वाले मेले को कुंभ कहा जाता है, लेकिन उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ को सिंहस्थ कहा जाता है। सिंहस्थ में विवेकानन्द एवं रामकृष्ण मिशन के मानने वाले भी आते हैं। परमेश्वर पूरी सृष्टि में विद्यमान है। डॉ. यादव ने कहा कि आध्यात्मिकता की यात्रा ही भारत की विकास यात्रा है। उज्जैन में स्थित डोंगला में स्टैंडर्ड टाइम की गणना होती है। विमर्श कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने एकनाथ रनाडे के विचारों पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमार के विद्यार्थियों द्वारा लिखित पुस्तक ध्येयनिष्ठ जीवन का विमोचन किया। इस अवसर पर स्मिता दीदी ने तीन ओंकार प्रार्थना की प्रस्तुति दी। नन्दन जोशी ने सभी अतिथियों का परिचय दिया। मानस भट्टाचार्य ने एकल गीत का गायन किया।

आध्यात्मिकता केवल उपासना तंत्र नहीं - पद्मश्री डॉ. भिड़े
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष पद्मश्री डॉ.निवेदिता भिड़े ने कहा कि अध्यात्मिकता केवल एक उपासना तंत्र नहीं है, अपितु आध्यात्मिकता के सम्बन्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि स्वभाव ही अध्यात्मिकता है। अपनेपन के दायरे में जो आता है, वह अध्यात्मिकता है। जो व्यक्ति परिवार, समाज और देश के बारे में सोचता है, वह अध्यात्मिकता ही है। व्यक्ति का विस्तृत स्वरूप परिवार है। परिवार का विस्तृत स्वरूप समाज है। समाज का विस्तृत स्वरूप राष्ट्र है और राष्ट्र का विस्तृत स्वरूप ही सम्पूर्ण विश्व है। व्यक्ति अपना स्वाभाविक जीवन जीते हुए नि:स्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है, वह सब अध्यात्मिकता ही है। इस दौरान प्रबंध निदेशक इंजीनियरिंग प्रा.लि. के प्रतीक पटेल ने कहा कि उज्जैन में जब से महाकाल लोक बना है, तब से उज्जैन का आर्थिक विकास उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है।  

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