जैसा कि नाम से ही जाहिर है, बड़नगर यानी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बड़ यानी वट वृक्षों की अधिकता रही होगी। चामला नदी के मुहाने पर बसा उज्जैन जिले का बड़नगर धार्मिक नगरी महाकाल के समीप स्थित है। जब चुनाव की बात होती है हर स्थान किसी न किसी प्रसंग में चर्चा का केंद्र बिंदु बन जाता है, यही हाल हुआ बड़नगर का। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2023 में पहले बड़नगर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर राजेंद्र सोलंकी को प्रत्याशी घोषित किया पर मोरवाल के बागी तेवर के आगे झुक कर फिर 2018 में विजयी कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल को टिकट दे दिया। पिछली बार यही स्थिति भाजपा में बनी थी।
सोलंकी हुए बागी, बतौर निर्दलीय मैदान में
राजेंद्र सोलंकी ने कांग्रेस का टिकट मिलते ही प्रचार प्रसार आरंभ कर दिया था। कई क्षेत्रों में उन्होंने मेल मुलाकात का दौर भी जारी रखा। फिर कांग्रेस से बगावत करते हुए एकाएक टिकट कटने से नाराज हो गए और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े होने का मन बना लिया। टिकट बदलने की इस नाराजगी का सोलंकी समर्थकों ने भोपाल जाकर विरोध किया था और पीसीसी मुख्यालय के बाहर एक समर्थक ने आत्मदाह का भी प्रयास किया था।
भाजपा ने जितेंद्र का टिकट काटकर संजय शर्मा को दिया था
2018 के विधानसभा चुनाव में ठीक इसी तरह की परिस्थिति भाजपा में निर्मित हुई थी, जितेंद्र पंड्या को भाजपा ने टिकट दे दिया था और ऐनवक्त पर संजय शर्मा को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। तब इस बात का भाजपा में काफी विरोध हुआ था। इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा था और पिछले तीन बार से बड़नगर की भाजपा की कब्जे वाली सीट पर पराजय का सामना करना पड़ा था तथा कांग्रेस के मुरली मोरवाल विजयी हुए थे।
तीन बार विधायक बने भाजपा के उदयसिंह पंड्या
बड़नगर से तीन बार विधायक बनने का रिकॉर्ड भाजपा के उदयसिंह पंड्या का है और दो बार शांतिलाल डाबी का। उदयसिंह पंड्या तीन बार चुनाव में पराजित भी हुए थे। 1952 और 1957 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा था। 1962 और 1967 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार यहां से विजयी रहे थे। फिर 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में जनता पार्टी का कब्जा हो गया था। बड़नगर में लगातार दो बार के अलावा विजय की हैट्रिक भाजपा ने ही बनाई है। बड़नगर पर किसी एक दल का लंबे समय तक आधिपत्य नहीं रहा।
मोरवाल खुश पर सोलंकी खफा
कांग्रेस ने टिकट बदल का पूर्व विधायक मुरली मोरवाल पर पुनः भरोसा कायम रखा है, वहीं कांग्रेस में टिकट कटने से नाराज सोलंकी के बागी रहने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने युवा जितेंद्र पंड्या को उम्मीदवार बनाया है ताकि 2018 की गलती से हुई पराजय को विजय में बदल कर भरपाई की जा सके। जितेन्द्र पंड्या के पिता उदयसिंह पंड्या क्षेत्र के जमीनी कार्यकर्ता और तीन बार के विधायक रहे हैं। इस उम्मीदवार की अदला-बदली के खेल में कौन बाजी मार लेगा यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा?
कुल मतदाता संख्या
2 लाख 4 हजार 99, पुरुष-1 लाख 3 हजार 403 महिला-1 लाख 690 और किन्नर 6
रोचक जानकारी
- बड़नगर विधानसभा सीट से एकमात्र महिला वर्ष 2008 में बहुजन समाज पार्टी से सरस्वती परमार चुनाव में मैदान में थीं, उन्हें 1190 मत प्राप्त हुए थे और जमानत जब्त हो गई थी।
- सबसे कम प्रत्याशी 1977 में थे, जिनकी संख्या दो थी और सर्वाधिक 2018 में 10 रही।
- न्यूनतम मतदान 1957 और सर्वाधिक मतदान 2018 में हुआ था।
- सबसे बड़ी विजय भाजपा के शांतिलाल डाबी की 20,407 मतों से हुई और सबसे कम मतों से जीत 1962 में सोशलिस्ट पार्टी के रामप्रकाश ईश्वरप्रसाद की 175 मतों से रही थी।