मकर संक्रांति के पावन पर्व पर इस वर्ष भी एक अनूठी आध्यात्मिक और सामाजिक पहल देखने को मिली। उज्जैन के शनि नवग्रह मंदिर, जहां हर ग्रह का अपना भूगर्भ अलग है, वहां कृष्णा गुरुजी के सानिध्य में सूर्य देव की भव्य सवारी निकाली गई। 108 बटुक ब्राह्मणों ने डमरू, ढोल, ताशे और शंखनाद के साथ भगवान सूर्य की शोभायात्रा निकाली। पालकी में विराजमान सूर्य देव का स्वागत शनि रूपी पुत्र ने किया। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न ग्रहों के ध्वज लिए बटुक ब्राह्मण चल रहे थे। इस सवारी ने पिता-पुत्र के प्रेम का अद्भुत संदेश दिया।
पूजा-अर्चना और सूर्य-शनि का मिलन
सूर्य देव की पालकी त्रिवेणी संगम पहुंची, जहां आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और जयकारों के बीच सूर्य देव का पूजन किया गया। साथ ही शनि मकर राशि के गर्भगृह में सूर्य देव की प्रतिमा स्थापित की गई। मंत्रोच्चारण और हवन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी शैलेन्द्र त्रिवेदी, आयोजक कृष्णा गुरुजी एवं आमंत्रित स्वामी नारायण मंदिर के प्रधान जीवन दास जी और मंदिर के प्रधान राकेश गुरु ने इस आयोजन का नेतृत्व किया।
कृष्णा गुरुजी का संदेश: मकर संक्रांति पिता-पुत्र प्रेम का प्रतीक
कृष्णा गुरुजी ने बताया कि हर त्योहार एक विशेष संदेश लेकर आता है। मकर संक्रांति, जो कैलेंडर वर्ष 2025 का पहला त्योहार है, खगोलीय, वैज्ञानिक, और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पिता-पुत्र प्रेम का संदेश देती है। सूर्य और शनि, जिनके संबंधों में शत्रुता कही जाती है, फिर भी एक-दूसरे के घर जाना नहीं छोड़ते। यह पर्व हमें सिखाता है कि पिता और पुत्र अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे का सम्मान करें और समय बिताएं। गुरुजी ने कहा कि हमारे रिश्तों में ग्रहों का गहरा प्रभाव होता है। उन्होंने समझाया कि सूर्य पिता, चंद्र माता, मंगल भाई-बहन, बुध मामा, गुरु पति-बच्चे, शुक्र पत्नी, और शनि अधीनस्थ कर्मचारी का प्रतीक हैं। यह संदेश दिया गया कि घर और ग्रहों के बीच का संबंध समझना आवश्यक है।
मकर संक्रांति का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व
- इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिले थे।
- गंगा नदी इस दिन सागर में मिली थी।
- भगवान विष्णु ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी।
- भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था।
- महाभारत के भीष्म पितामह ने इसी दिन प्राण त्यागे थे।
देश-विदेश से शामिल हुए श्रद्धालु
इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से लोग शामिल हुए। कनाडा से बलजिंदर जी, दिल्ली से तेजिंदर जी, और उज्जैन, इंदौर, भोपाल के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के राकेश बजाज, राजेंद्र शर्मा, अनिल कुमार भारती, और मंडलोई ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम के अंत में नवग्रह मंत्रों के साथ हवन और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।