बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस्कॉन मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की तबीयत सहस्त्र जलधाराओं से स्नान के बाद बिगड़ गई है। परंपरा के अनुसार स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके चलते मंदिर के पट भक्तों के दर्शन के लिए बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के सेवकों ने बताया कि भगवान को सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए पूरी निष्ठा से सेवा की जा रही है। परंपरा का पालन करते हुए भगवान ने अन्न और जल का त्याग कर दिया है।
मंदिर सेवक अनंत गोपाल दास ने बताया भगवान को दिन में तीन बार विशेष औषधीय काढ़ा पिलाया जा रहा है ताकि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो। राजभोग के समय उन्हें बहुत ही सात्विक और हल्की खिचड़ी का भोग लगाया जा रहा है। पुजारियों और भक्तों का पूरा ध्यान भगवान के शीघ्र स्वस्थ होने पर है। मंदिर परिसर में लगातार विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा
मान्यताओं के अनुसार भगवान आषाढ़ अमावस्या तक एकांतवास में रहकर स्वास्थ्य लाभ करेंगे। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को उन्हें विशेष स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे और मंदिर के पट फिर भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान के स्वस्थ होने के अगले दिन यानी 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इस दिन प्रभु नगर भ्रमण पर निकलकर भक्तों को दर्शन देंगे। फिलहाल श्रद्धालु अपने आराध्य के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं और रथयात्रा के दिन के दर्शन को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
ऐसे लगाया जा रहा भोग
ऐसे लगाया जा रहा भोग