पश्चिम रेलवे की आरपीएफ टीमों ने ट्रेनों के लगेज डिब्बों (SLR/दिव्यांग कोच) को निशाना बनाने वाली एक बेहद शातिर और हाई-टेक अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है। आरपीएफ उज्जैन, सूरत क्राइम ब्रांच और मुंबई मंडल की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरोह के सरगना सहित तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ट्रेनों से चुराए गए लाखों रुपये मूल्य के रेडीमेड गारमेंट्स और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बरामद की गई है।
मेंटेनेंस कर्मचारी बनकर करते थे वारदात
गैंग के काम करने का तरीका सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। गिरोह के सदस्य बाकायदा रेलवे मेंटेनेंस विभाग की ड्रेस पहनकर दिव्यांग कोच या SLR डिब्बों में दाखिल होते थे। वे अपने साथ इलेक्ट्रिक कटर रखते थे। यात्रा के दौरान ही ट्रेन के अंदर लोहे की चादर और प्लाईवुड की दीवार काटकर पार्सल कोच में घुस जाते थे। सहयात्रियों को लगता था कि रेलवे कर्मचारी मेंटेनेंस का काम कर रहे हैं, जबकि वे चोरी की घटना को अंजाम देकर बीच रास्ते में ही उतर जाते थे।
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19 सितंबर की चोरी से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब 19 सितंबर को ट्रेन संख्या 15569 (अहमदाबाद-दरभंगा अंत्योदय एक्सप्रेस) के SLR कोच को कटर से काटकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी के पार्सल चोरी होने की शिकायत दर्ज हुई। इसके साथ ही मुंबई मंडल की एक ट्रेन से भी भारी मात्रा में लेडीज रेडीमेड गारमेंट्स चोरी होने की बात सामने आई। पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जॉइंट टीम का गठन किया गया, जिसमें आरपीएफ क्राइम ब्रांच सूरत के निरीक्षक अशोक कुमार, आरपीएफ उज्जैन के निरीक्षक नरेंद्र यादव और अमलनेर के निरीक्षक सत्यजीत शामिल थे।
वाराणसी और मुंगेर से दबोचे गए आरोपी
तकनीकी साक्ष्यों और सूचना तंत्र के आधार पर आरपीएफ टीम ने उत्तर प्रदेश और बिहार में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसमें गिरोह के मास्टरमाइ्ंड अनिल पटेल को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया। जबकि मुख्य सरगना के दोनों सक्रिय सहयोगियों मोहम्मद जाहिद और मोहम्मद विक्की को मुंगेर (बिहार) से दबोचा गया। मास्टरमाइंड अनिल पटेल के वाराणसी स्थित गोदाम पर छापा मारकर आरपीएफ ने रेलवे से चोरी किए गए 5.60 लाख से अधिक मूल्य के रेडीमेड लेडीज गारमेंट्स तथा एक अन्य चोरी के 1.50 लाख मूल्य की आर्टिफिशियल ज्वेलरी बरामद की है।
गैंग के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए आरपीएफ की टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं। इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह को पकड़ने और घटना का सफल पर्दाफाश करने में RPF के उप निरीक्षक (SI) यशपाल सिंह, सहायक उप निरीक्षक (ASI) साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक कमल सिंह और राजाराम यादव की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।