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Ujjain News: होलाष्टक 24 फरवरी से, शुभ कामों पर लगेगा ब्रेक; 3 मार्च को होलिका दहन पर होगा समापन

Fri, 20 Feb 2026 07:42 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा, जो होली पर समाप्त होगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, निवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि ग्रह अनुकूल नहीं होते। दान-पुण्य व भगवान विष्णु, शिव, राम, हनुमान की पूजा शुभ मानी जाती है; प्रह्लाद कथा से जुड़ी परंपरा है।
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होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रंगों के त्यौहार होली का सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है। होली से आठ दिन पहले फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक की शुरुआत होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है जिसका समापन 3 मार्च को होली पर होगा। सनातन धर्म में होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों नहीं किए जाते। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थितियां अनुकूल नहीं होतीं जिससे कामों में बाधा आती है। इसी कारण होलाष्टक पर शुभ कार्यों पर ब्रेक लगता है। 

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दरअसल, पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है। ऐसे में इस तिथि की शुरुआत 24 फरवरी से होगी, वहीं इसका समापन होलिका दहन के दिन 3 मार्च को होगा। सनातन परंपरा में होलाष्टक को अशुभ घड़ी माना गया है। कहते हैं कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का प्रतिफल अच्छा नहीं होता है इसलिए होलाष्टक के दौरान शुभ काम नहीं किए जाते। इस दौरान विवाह, सगाई और नए रिश्ते की शुरुआत, गृह प्रवेश या नए घर का निर्माण कार्य, मुंडन संस्कार, नामकरण और अन्य सोलह संस्कार, नया वाहन, संपत्ति की खरीदारी और व्यापार में कोई बड़ा या नया निवेश नहीं करना चाहिए।

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होलाष्टक में क्या करना शुभ
पंडितों ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के 8 दिन दान-पुण्य, ध्यान, पूजा पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही इस समय भगवान विष्णु, शिव, राम या हनुमान जी की आराधना करना भी बेहद फलदायी माना जाता है।
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यह है पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरण्याकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को विष्णु भक्ति के कारण फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक 8 दिनों तक भीषण यातनाएं दी थीं इसलिए इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है। 

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