बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में गणेश उत्सव की अद्भुत छटा देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां ऐतिहासिक सिद्धिविनायक मंदिर में 5.51 लाख मोदक का भव्य महाभोग लगाया गया, वहीं दूसरी ओर लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति ने 250 मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बांटकर इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव की अनूठी मिसाल पेश की है।
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर को स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया। सुबह भगवान का पंचामृत अभिषेक कर मनमोहक शृंगार हुआ और उन्हें स्वर्ण आभूषण धारण कराए गए। इस अवसर पर भगवान को 5,51,000 मोदक लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बेटे वैभव यादव ने कार्यक्रम में शिरकत कर महाआरती की और श्रद्धालुओं को मोदक का प्रसाद बांटा। राजा भरथरी द्वारा स्थापित और रक्षासूत्र (मौली धागे) की मान्यता के लिए प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
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निशुल्क बांटी गईं मिट्टी की मूर्तियां
- फोटो : अमर उजाला
शिप्रा नदी को बचाने की पहल
उत्सव के इस उल्लास के बीच पर्यावरण और पवित्र नदियों के संरक्षण की बड़ी मुहिम भी देखने को मिली। लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति द्वारा वर्ष 2014 से चलाए जा रहे अभियान के तहत इस वर्ष भी 250 मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं निःशुल्क वितरित की गईं। समिति का लक्ष्य प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से शिप्रा नदी को होने वाले जल प्रदूषण से बचाना है। कार्यक्रम के दौरान उज्जैन उत्तर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश पांचाल और भाजपा नेत्री सोनल अजय जोशी ने समिति की सराहना करते हुए कहा कि नदियां हमारी जीवनदायिनी हैं। सनातन परंपरा में मिट्टी के पूजन का विशेष महत्व है, इसलिए हर घर में 'माटी के गणेश' विराजमान होने चाहिए। उज्जैन में श्रद्धा, परंपरा और पर्यावरण की इस अनोखी जुगलबंदी की पूरे शहर में खूब चर्चा हो रही है।