एशिया बौद्ध शिखर सम्मेलन मे 38 देशों के विद्वानों के बीच उज्जैन के बौद्ध भिक्खु डॉ सुमेध थेरो न
पहली एशियाई बौद्ध समिति का शुभारंभ भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया गया। इस आयोजन में 38 देशों के विद्वानों द्वारा 70 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें 700 से अधिक बौद्ध विद्वानों ने भाग लिया। इस प्रथम एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से किया गया। शिखर सम्मेलन का विषय "एशिया को मजबूत बनाने में बुद्ध धम्म की भूमिका" था। इसका उद्देश्य एशिया में प्रचलित विभिन्न परंपराओं, प्रथाओं और विश्वासों के बीच एक साझा संबंध की खोज करना था, और इस पर चर्चा करना कि बुद्ध की शिक्षाएं समकालीन चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकती हैं और शांति को कैसे बढ़ावा दे सकती हैं।
सम्मेलन में पूरे एशिया से संघ के नेता, विद्वान और अभ्यासी शामिल हुए। उज्जैन के बौद्ध भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम में अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया, जिसके लिए उन्हें प्रमाण-पत्र और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया।
डॉ. सुमेध थेरो ने "एशिया में बुद्ध धम्म को मजबूत करने के लिए नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीतियों में गतिशीलता" विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए कहा कि हालिया वैश्विक और आंतरिक राजनीतिक एवं आर्थिक परिदृश्य के साथ, म्यांमार के माध्यम से भूमि संपर्क और बांग्लादेश के माध्यम से समुद्री संपर्क भारत के लिए वियतनाम और फिलीपींस के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। वर्ष 2017 में, भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम ने एक मंच के रूप में सभी हितधारकों को एक साथ लाने और जापानी सहायता से चल रही परियोजनाओं के समन्वय हेतु शुरुआत की। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में बौद्ध विरासत के अधिकांश हिस्से नष्ट हो जाने के कारण, बौद्ध धर्म का सबसे पश्चिमी गढ़ अब लद्दाख का ऊंचाई वाला क्षेत्र है। यह क्षेत्र तिब्बती संस्कृति से परिचय कराता है और भारतीय रेलवे की बौद्ध सर्किट ट्रेन द्वारा बुद्ध के महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ता है।
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