इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र में रहने वाले मदन सोनी ने उज्जैन मेें जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन किया था, क्योकि वे इंदौर आने से पहले उज्जैन रहते थे। उनका रिकार्ड भी उज्जैन के कलेक्टर कार्यालय में था। बार बार चक्कर काटने के बावजूद मदन का प्रमाण पत्र नहीं बना पा रहा था। तहसीलदार राधेश्याम पाटीदार का रीडर वीरेंद्र नकवाल अधूरे दस्तावेजों का हवाला देकर प्रमाण पत्र बनाने से इनकार कर रहा था। सोनी ने प्रमाण पत्र के लिए वीरेंद्र से बात की तो वीरेंद्र ने ढाई हजार रुपये ले लिए और प्रमाण पत्र बनाकर देने का वादा किया।
16 नंवबर को पैसे देने के बावजूद रीडर एक हजार रुपये और मांग रहा था। इसके बाद मदन सोनी ने लोकायुक्त पुलिस को इसकी शिकायत कर दी थी। मंगलवार को कार्रवाई के लिए टीम कलेक्टर कार्यालय पहुंची और रीडर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। मदन को दो केमिकल लगे नोट दिए गए। मदन ने रीडर को नोट दिए और जाति प्रमाण पत्र मांगा।
प्रमाण पत्र देने से पहले लोकायुक्त की टीम उसके सामने खड़ी हो गई तो वह बोला कि मैने रिश्वत नहीं ली। लोकायुक्त अफसरों ने उसके हाथ धुलवाएं तो केमिकल के कारण नोट का पीला रंग रीडर के हाथों में भी लग गया। अफसरों ने नोट बरामद कर लिए। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।