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उज्जैन: 45 वर्षों बाद बदला महाकाल मार्ग का स्वरूप, राजसी सवारी से पहले चमकी सड़कें; लोग बोले- थैंक यू सीएम

Wed, 02 Sep 2026 10:13 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन में 7 सितंबर को महाकालेश्वर की अंतिम राजसी सवारी निकलेगी। इससे पहले कंठाल चौराहा से सती गेट होते हुए छत्री चौक तक मार्ग चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम पूरा किया जा रहा है। सती गेट को हेरिटेज लुक, बिजली तारों की अंडरग्राउंड शिफ्टिंग और बेहतर प्रकाश-सफाई व्यवस्था की गई है। 
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तैयार हो रहा बाबा महाकाल की सवारी मार्ग
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विस्तार
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आगामी 7 सितंबर को निकलने वाली भगवान श्री महाकालेश्वर की छठी एवं अंतिम भव्य राजसी सवारी को लेकर अवंतिका नगरी में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। इस वर्ष की राजसी सवारी श्रद्धालुओं के लिए खास और सुगम होने जा रही है, क्योंकि सवारी मार्ग के सबसे प्रमुख और संकरे हिस्से कंठाल चौराहा से सती गेट होते हुए छत्री चौक तक का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य युद्धस्तर पर पूर्ण किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि और दूरगामी सोच के लिए उज्जैन के क्षेत्रवासियों, स्थानीय निवासियों एवं व्यापारियों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सहर्ष धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है।

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समय-सीमा में कार्य पूर्ण होने की चौतरफा सराहना
कंठाल से सती गेट मार्ग का चौड़ीकरण बीते 45 साल से अटका हुआ मास्टर प्लान था। संकरे रास्ते के कारण हर साल महाकाल की सवारी के दौरान श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों और भीड़ का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते सिंहस्थ महापर्व 2028 की अग्रिम तैयारियों के तहत नगर निगम द्वारा इस मार्ग को लगभग 15 मीटर चौड़ा कर विकसित कर दिया गया है। राजसी सवारी से पूर्व ही समय-सीमा में इस जटिल कार्य को पूरा करने पर नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार की खूब सराहना की जा रही है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन ने न केवल सड़क चौड़ी की, बल्कि इसे 5 सितंबर तक पूर्ण फिनिशिंग और सफाई के साथ राजसी सवारी के अनुरूप भव्य रूप देने का प्रयास जारी है।

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व्यापारियों ने दिल खोलकर न्योछावर की ज़मीन
इस विकास कार्य की सबसे बड़ी खूबसूरती स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का सहयोग रहा। कई व्यापारियों की पुश्तैनी दुकानें और मकान इस चौड़ीकरण की ज़द में आए, लेकिन बाबा महाकाल के भक्तों की सुविधा और शहर के गौरव के लिए सभी ने बिना किसी विरोध के अपनी ज़मीनें न्योछावर कर दीं। व्यापारियों का मानना है कि यह अभूतपूर्व विकास कार्य न केवल अगले 100 साल की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच उज्जैन का मान बढ़ाएगा।

सवारी मार्ग की प्रमुख आकर्षण एवं नगर निगम की विशेष तैयारियां:

  • सती गेट को मिला हेरिटेज लुक : क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के लिए सती गेट के दोनों ओर 50 मीटर के हिस्से में आकर्षक कोबल स्टोन लगाए गए हैं, जिससे इसे भव्य हेरिटेज स्वरूप मिला है।

  • तारों के जाल से मुक्ति : कंठाल चौराहा पर पेवर ब्लॉक लगाने के साथ ही सभी बिजली के तारों की अंडरग्राउंड शिफ्टिंग कर दी गई है, जिससे पूरा चौराहा अब साफ और सुंदर दिखाई दे रहा है।

  • दिन-रात मॉनिटरिंग : नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देशन में निगम की टीमों ने दिन-रात एक कर कोबल स्टोन, पेवर ब्लॉक, प्रकाश व्यवस्था और सफाई का कार्य समय से पहले पूरा किया।

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चांदी की पालकी में प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल
7 सितंबर को बाबा महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। तेलीवाड़ा, कंठाल चौराहा और सती गेट से होकर गुजरने वाली इस अंतिम राजसी सवारी में अब श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के सुगमता से दर्शन का लाभ मिलेगा। चौड़े और सजे-धजे मार्ग पर इस बार भक्ति, आनंद और उत्साह का एक अलग ही नजारा देखने को मिलेगा।

 

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