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Ujjain: 323 भिक्षुकों को रेस्क्यू कर भेजा सेवाधाम, आश्रम के संचालक ने दिलाई शपथ; आगे से भीख नहीं मांगेंगे

Tue, 17 Dec 2024 02:53 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

Ujjain:  सेवाधाम आश्रम के सुधीर भाई गोयल ने बताया इनमें 126 पुरुष, 163 महिलाएं और 64 बच्चे शामिल हैं। सभी गंदे कपड़ों में और दयनीय स्थिति में पाए गए। इन्हें भोजन, वस्त्र देने के साथ ही देखभाल की जिम्मेदारी ली गई है। जब इन भिक्षुकों के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि इनमें कई संपन्न घराने के हैं। 
 
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323 भिक्षुकों को रेस्क्यू कर भेजा सेवाधाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए प्रशासन का अभियान जारी है। इसके तहत पिछले सप्ताह महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने 323 भिक्षुकों का रेस्क्यू किया। इन्हें उज्जैन के अम्बोदिया स्थित सेवाधाम आश्रम भेजा गया है। यहां इन भिक्षुकों की स्थिति और पृष्ठभूमि की जानकारी ली गई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।

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एक महिला के पास उज्जैन के पास 10 बीघा उपजाऊ जमीन है। तो एक अन्य महिला विकलांग है और भीख मांगकर रोजाना 2500 रुपये तक जमा कर लेती है। उज्जैन के सेवा धाम आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल ने सभी को शपथ दिलाई कि आगे से भीख नहीं मांगेंगे। 

अब सेवा धाम आश्रम में इन सबका पुनर्वास किया जा रहा है। जिन लोगों को शारीरिक तकलीफ है, उनकी फिजियोथैरेपी कराई जा रही है। इनमें कुछ महिलाएं तो ऐसी है, जिसके पास 10 बीघा तक जमीन है तो एक महिला महीने के 75 हजार रुपये भीख मांग जमा कर लेती है। 
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महिला भीख मांगकर कमाती है रोजाना दो हजार
पता चला कि भीख मांगने वाली एक अन्य महिला दिव्यांग है और वह भीख मांगकर 1500 से 2500 रुपये रोजाना जमा कर लेती है और वह ड्रग्स की आदी है। इंदौर के राजबाड़ा क्षेत्र में भीख मांगने वाली एक महिला को भी सेवाधाम आश्रम लाया गया। ये महिला एक दुर्घटना के बाद शारीरिक रूप से अक्षम हो गई। ये महिला अब भीख मांगकर महीने में 50 हजार रुपये तक जमा कर लेती है। एक महिला के पास रेस्क्यू के समय 75 हजार रुपए नकद मिले। भिक्षावृत्ति को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने सभी का रेस्क्यू किया और इनसे बांड भरवाए गए। 

यह बोले इंदौर से आए लोग
75000 रुपए हफ्ता कमाने वाली महिला से पूछा कि इतना पैसा कहां से आया? उनका जवाब था- भीख नहीं मांगती हूं, पैसा सिलाई कर जोड़ा है। खास बात यह है कि अब सभी ने आगे से भीख नहीं मांगने का संकल्प लिया है। 10 बीघा जमीन की मालकिन इंदौर के बड़ा गणपति मंदिर के चौराहे पर भीख मांगने वाली कलाबाई गुर्जर भी सेवाधाम आश्रम में हैं। वे बताती हैं, ‘इंदौर में एयरपोर्ट कॉलोनी के पास व्यास नगर में पति लक्ष्मी नारायण गुर्जर के साथ रहती हूं। इसी कॉलोनी में एक प्लॉट भी खरीद रखा है। उज्जैन के पास उन्हेल में 10 बीघा उपजाऊ जमीन है।

भीख मांगकर रोजाना 500 से 600 रुपए कमा लेती हूं। तीन बच्चे- दो बेटे और एक बेटी है।’।महीने की कमाई 45 से 60 हजार रुपए पूनम वर्मा भी इंदौर के राजबाड़े पर भीख मांगकर रोजाना 1500 से 2500 रुपए कमाती है। पूनम ने बताया, ‘पति की मौत के बाद घरों में खाना बनाकर अपने दो बच्चों को पाल रही थी। एक दिन महू नाके के पास ट्रक के नीचे आने की वजह से मेरा एक पैर काटना पड़ा। कोई काम नहीं मिला, तो डेढ़ साल से मांगकर गुजारा शुरू कर दिया।’ पूरम ने बताया, ‘मेरा मायका उज्जैन का ही है। बच्चे इंदौर के जीवन ज्योति आश्रम में रहते हैं। मुझे उनसे मिलना है।’ इतना कहकर वो रोने लगी।

75 हजार रुपए हफ्ता कमाने वाली बोली- एक पैसा भीख का नहीं इंदौर में भीख मांगकर खाने वालों के रेस्क्यू में सबसे ज्यादा चर्चा 72 साल की शकुंतला बाई की हुई। उनके पास 75 हजार रुपए कैश मिले थे। उन्होंने तब कहा था कि ये उनकी एक हफ्ते की कमाई है। आश्रम आकर शकुंतला का कहना है, ’75 हजार रुपए मैंने सिलाई कर जोड़े हैं। बहुत रुपए इकट्ठा करना है, घर बनाना है।

20 साल से पैसा जोड़ रही हूं।’ जब उनसे पूछा गया कि आप तो बोल रही थी कि 7 दिन की कमाई है? बोली, ‘नहीं, मैं भीख नहीं मांगती। 40 साल से सिलाई का काम कर रही हूं। मैं काम करने जा रही थी। पुलिस मुझे पकड़कर ले आई।’उनसे फिर पूछा गया कि आपके पास तो 10, 20, 5 रुपए के नोट/कलदार मिले हैं, पैसा आप शरीर में क्यों बांधी थी, बैंक में क्यों नहीं जमा कराए? इस पर कहा, ‘एक पैसा भी भीख का नहीं है। बैंक वाले 2 साल से पैसे नहीं ले रहे।’ उन्होंने बताया, ‘घर में अकेली रहती हूं। दो लड़के बाहर रहते हैं।’

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