उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई। पुरातत्व विभाग ने प्रतिमा को हिलाने पर दरार या खंडित होने की आशंका जताई, जिसके बाद पुजारी और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से लिखित गारंटी मांगी है।
धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी उज्जैन में विकास और सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत करीब 170 साल पुराने प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को विस्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन यह कार्रवाई कर रहा है। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का साक्षी रहा यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उज्जैनवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।
मंदिर के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होते ही पाँच पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहे पुजारी परिवार और स्थानीय श्रद्धालु भावुक हो गए हैं। इस बीच सबसे बड़ा विवाद हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने को लेकर खड़ा हो गया है।
उनका कहना है कि यदि विस्थापन के दौरान प्रतिमा में जरा सी भी दरार आती है या प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होनी चाहिए। संगठनों ने साफ कहा है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक विस्थापन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा और मंदिर की धार्मिक गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विस्थापन की प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी और पूरी सावधानी के साथ की जाएगी। फिलहाल, सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास को लेकर प्रशासन अपने फैसले पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन पुरातत्व विभाग की आशंका और प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर लिखित गारंटी की मांग ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।