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उज्जैन: दूल्हा बनेंगे महाकाल, नौ दिनों तक देंगे विविध रूपों में दर्शन...21 फरवरी से मनाया जाएगा शिव नवरात्रि उत्सव

Thu, 03 Feb 2022 01:45 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 21 फरवरी से शिव नवरात्रि उत्सव मनाया जाएगा। भगवान महाकालेश्वर दूल्हा बनेंगे और नौ दिनों तक अलग-अलग रुपों में दर्शन देंगे। विशेष पूजन किया जाएगा। 
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भगवान महाकालेश्वर उज्जैन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके पहले शिव नवरात्रि मनाई जाएगी। 21 फरवरी से इसकी शुरुआत होगी जिसमें भगवान महाकाल दूल्हा बनेंगे। नौ दिनों तक विविध स्वरूपों में उनका शृंगार किया जाएगा। 
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दरअसल, महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि से पहले शिव नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है और श्रद्धालु बाबा महाकाल के मनोहारी स्वरूप के दर्शन करने पहुंचते हैं। कोरोना के चलते बीते वर्षों में उत्सव का उल्लास थोड़ा कम हुआ था, लेकिन इस बार हर्षोल्लास के साथ ये पर्व मनाए जाने की तैयारी है। 21 फरवरी से शिव नवरात्रि महोत्सव शुरू होगा। इसके तहत भगवान महाकाल दूल्हा बनेंगे। नौ दिनों तक अलग-अलग रूपों में उनका शृंगार किया जाएगा। विशिष्ट पूजन क्रम के चलते भोग आरती व संध्या पूजन का समय बदलेगा। महाशिवरात्रि पर एक मार्च को महानिशा काल में महाकाल की महापूजा होगी। 2 मार्च को साल में एक बार दिन में होने वाली भस्म आरती दोपहर 12 बजे से होगी। 

अलग-अलग स्वरूप में दर्शन देंगे महाकाल
मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार शिव नवरात्रि में सुबह 8 बजे नेवैद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन होगा। इसके बाद कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर व रामेश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन किया जाएगा। गर्भगृह में भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक-पूजन होगा। पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मण रुद्र पाठ करेंगे। दोपहर करीब एक बजे भोग आरती होगी। दोपहर तीन बजे संध्या पूजन के बाद भगवान का विशेष शृंगार किया जाएगा। आम दिनों में भोग आरती सुबह 10.30 बजे तथा संध्या पूजा शाम पांच बजे होती है। शिव नवरात्रि के चलते महाकाल मंदिर के पुजारी 21 फरवरी से 1 मार्च तक नौ दिन उपवास रखेंगे। शिव नवरात्रि के पहले दिन भगवान महाकाल को सोला (धोती), दुपट्टा व शीश पर चांदी का मुकुट धारण करवाया जाएगा। निरंतर क्रम से भक्तों को भगवान के शेषनाग, मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, शिव तांडव, उमा महेश, होल्कर, घटाटोप तथा सप्त धान मुखारविंद में दर्शन होंगे। महाशिवरात्रि के लिए 29 फरवरी की रात तीन बजे मंदिर के पट खुलेंगे। दो मार्च की रात 11 बजे तक निरंतर 44 घंटे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे। 
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