महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार सुबह एक ओर जहां भस्म आरती चल रही थी, वहीं दूसरी ओर सिंहस्थ 2028 को लेकर निर्माण कार्य जारी था। इसी दौरान खुदाई करते समय जेसीबी चालक नरेश प्रजापति को मशीन के पंजे में शिवलिंगनुमा आकृति दिखाई दी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना मंदिर प्रशासन को दी।
जानकारी मिलते ही मंदिर के पुजारी और श्रद्धालु मौके पर पहुंचे। जांच करने पर यह एक अत्यंत प्राचीन शिवलिंग प्रतीत हुआ। इसके बाद पुजारियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने भी वहां पहुंचकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और आशीर्वाद लिया।
मंदिर के पुजारी पंडित आशीष शर्मा ने बताया कि इन दिनों सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य जारी है। दत्त मंदिर के सामने महाकालेश्वर मंदिर चौराहा क्षेत्र में खुदाई की जा रही थी, जहां शिवलिंग के साथ कुछ अन्य प्राचीन पत्थर भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी है, जहां अनेक प्राचीन शिवलिंग मौजूद हैं। हालांकि, यह शिवलिंग कितना पुराना है, इसका सटीक पता पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ही चल सकेगा।
दर्शन कर भाव-विभोर हुए भक्त
सुबह मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को जैसे ही शिवलिंग मिलने की जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। किसी ने शिवलिंग पर जल चढ़ाया तो किसी ने दूध अर्पित कर भगवान शिव का पूजन किया। ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
पुरातत्व विभाग करेगा जांच
घटना के बाद एहतियात के तौर पर खुदाई कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। जल्द ही पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर शिवलिंग की प्राचीनता और विशेषताओं का अध्ययन करेगी।
ड्राइवर बोला-शिवलिंग दिखते ही रोक दिया काम
जेसीबी चालक नरेश प्रजापति ने बताया कि सुबह करीब चार बजे खुदाई के दौरान उन्हें मशीन के पंजे में शिवलिंग जैसी आकृति दिखाई दी। उन्होंने तुरंत इंजीनियर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद काम रोक दिया गया। अब अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई
फिलहाल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निर्माण कार्य रोक दिया है और पुरातत्व विभाग को सूचना दे दी गई है, ताकि शिवलिंग की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का सटीक आकलन किया जा सके। श्रद्धालु इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन और स्पर्श को अपने जीवन का सौभाग्य मान रहे हैं।