चिंतामण गणेश मंदिर के सामने स्थित महाकाल गुरुकुल आश्रम में आध्यात्मिक चिंतक कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’ ने सौ से अधिक बटुक ब्राह्मणों से नवरात्रि के महत्व पर संवाद किया। उन्होंने ‘कलियुग पुराण की दृष्टि से नवरात्रि और आपके जीवन का संबंध’ विषय पर वैदिक एवं सनातन परंपराओं को दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया।
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि नवरात्रि आराधना के साथ आत्मचिंतन, अनुशासन और अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर है। माता के नौ स्वरूपों से प्रेरणा लेकर जीवन में धैर्य, करुणा, साहस और कृतज्ञता जैसे गुण विकसित किए जा सकते हैं।
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उन्होंने चैत्र और शारदीय नवरात्रि का ऋतु परिवर्तन से संबंध समझाते हुए इस अवधि में संतुलित दिनचर्या, संयमित खानपान, स्वच्छता और ध्यान के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने धार्मिक परंपराओं के उद्देश्य को समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ उनका विवेचन करने पर जोर दिया।
कृष्णा गुरुजी ने कहा, “आप सनातन धर्म के भावी स्तंभ हैं। आने वाली पीढ़ी और आपके यजमान परंपराओं का अर्थ और तर्क भी जानना चाहेंगे। इसलिए केवल विधि बताना पर्याप्त नहीं होगा। उसके पीछे का उद्देश्य और जीवन में उसकी उपयोगिता भी समझानी होगी। जहां वैज्ञानिक आधार उपलब्ध हो, उसे सही तथ्यों के साथ प्रस्तुत करें।”
संवाद के दौरान बच्चों से नवदुर्गा के नौ नाम पूछे गए। इसके बाद मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के स्वरूपों का स्मरण कराते हुए सामूहिक ध्यान कराया गया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में महाकाल गुरुकुल की ओर से आचार्य रमेश शुक्ला एवं आचार्य हेमंत शर्मा उपस्थित रहे। कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसायटी की ओर से भारती मंडल सहित अन्य सहयोगियों ने सहभागिता की। समापन पर बटुकों को मिष्ठान्न वितरित किया गया।