फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उज्जैन: टीआई के नाम से ठगी, फोन कर कहा- मेरी गाड़ी खराब हो गई है, दस हजार रुपये खाते में डाल दो...

Sat, 27 Nov 2021 01:53 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

 पुलिस के नाम से ही ठगी की जा रही है। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से मदद के नाम पर रुपये मांगते हैं और रुपये मिलते ही चंपत हो जाते हैं। उज्जैन जिले के एक थाना प्रभारी के नाम से ठगी की ऐसी ही घटना सामने आई है। 
विज्ञापन
पुलिस थाना इंगोरिया। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ठगी के मामले में लोग न्याय के लिए पुलिस के पास जाते हैं  लेकिन ठगोरों ने नया तरीका इजाद कर लिया है। अब पुलिस के नाम से ही ठगी कर रहे हैं। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से मदद के नाम पर रुपये मांगते हैं और रुपये मिलते ही चंपत हो जाते हैं। उज्जैन जिले के एक थाना प्रभारी के नाम से ठगी की ऐसी ही घटना सामने आई है।  अब पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
विज्ञापन

दरअसल उज्जैन जिले के इंगोरिया थाने में पदस्थ टीआई पीएस खलाटे के नाम से क्षेत्र के कुछ लोगों के पास फोन पहुंचे। फोन करने वाले ने कहा कि वह इंगोरिया टीआई है और गाड़ी खराब हो गई है। ठीक करवाने के लिए रुपयों की जरुरत है। बैंक खाते में दस हजार रुपये जमा कर दो। ग्राम सिजावता के सरपंच के पास भी फोन गया। टीआई का नाम सुनकर उन्हें शंका भी नहीं हुई क्योंकि जिस नंबर से फोन आया था वह ट्रू कॉलर पर दरोगा के नाम से दर्ज था। इस पर सरपंच ने अपने साथ बैठे अमृतलाल से कहा। अमृतलाल ने तुरंत बताए गए बैंक खाते में दस हजार रुपये जमा करवा दिए। बाद में इस बात की जानकारी निकाली तो पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है। इसके बाद वह पुलिस थाने पहुंचा और लिखित आवेदन देकर शिकायत की। इस मामले में टीआई खलाटे ने कहा कि उन्होंने किसी को कोई कॉल नहीं किया। शिकायत की जानकारी सायबर सेल से की है। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति ने फोन किया था वह राजस्थान का है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

देवास में एएसपी के नाम से कॉल कर मांगे थे रुपये
पुलिस के नाम से ठगी का ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के देवास जिले में भी हो चुका है। यहां एडिशनल एसपी मंजीतसिंह चावला के नाम से जिले के एक थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर के पास फोन पहुंचा। सब इंस्पेक्टर से कहा कि पेट्रोल पंप पर जाकर मेरे खाते में रुपये जमा करवा दो। एसआई बिना कुछ सोचे पंप पर पहुंचा और पंप मालिक से उस नंबर पर बात करवाई जिस नंबर से कॉल आया था। पंप मालिक ने सोचा कि पुलिस अधिकारी है इसलिए रुपये जमा करवा दिए। दूसरे पंप मालिक के पास पहुंचने पर उसे शंका हुई। इसके बाद एएसपी से बात की तो पता चला कि उन्होंने किसी को कॉल नहीं किया। इस घटना को कई दिन बीत चुके हैं लेकिन पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी कि आखिर फोन किसने किया था और अब तक इस तरह के फोन कितनी बार किए जा चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें