बहन और पापा से कहा- यह सब कहां तक करेगा
ट्विशा ने अपनी बहन और पापा से चैट करते हुए कहा कि देखते हैं, ये सब कहां तक करेगा। उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा पापा। लेकिन मैं हर चीज के लिए तैयार हूं। अब आगे जो भी हो, मैं चाहती हूं उसे धैर्य और संयम के साथ संभाला जाए। कम से कम हम अपना धैर्य नहीं खोएंगे। बहन और पिता एक ही फोन पर चैट करते हुए कहा लिखा- शांत रहो, घबराओ मत, समझदारी से व्यवहार करो, ये सभी बुनियादी बातें जरूरी हैं।
'ट्विशा वैसी नहीं थी, जैसा हमने उसे समझा था'
ट्विशा शर्मा डेथ केस में ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह ने कहा, “हमारे वकील हर बात स्पष्ट करेंगे। अभी कहां आरोप तय हुए हैं? मामला अभी डिस्चार्ज स्टेज पर है। मुझे लगता है कि पुलिस ने इन लोगों के दबाव और व्हाट्सऐप मैसेज व आरोपों के आधार पर जल्दबाजी में कार्रवाई की है, जबकि इन आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम भला दो लाख रुपये दहेज की मांग क्यों करेंगे, जब हम खुद उन्हें साढ़े सात लाख रुपये दे चुके थे? यह बात बिल्कुल समझ से परे है। बहुत जल्द मुझे एहसास हो गया था कि ट्विशा वैसी नहीं थी, जैसा हमने उसे समझा था। हमने सोचा था कि वह बहुत संस्कारी और आध्यात्मिक विचारों वाली है। मैं उसके साथ संस्कृत के श्लोक भी पढ़ती थी, लेकिन बाद में उसने पूजा-पाठ पूरी तरह बंद कर दिया। कम से कम सुबह-शाम अगरबत्ती और दीपक जलाना, तुलसी पूजन करना हमारे घर की नियमित परंपरा थी, लेकिन उसमें उसकी कोई रुचि नहीं थी। उसने खुद कहा था कि उसकी इनमें बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है।”
गिरीबाला सिंह ने आगे कहा, “हां, उसने मेरे और डॉक्टर के सामने स्वीकार किया था कि उसने बड़ी मात्रा में गांजा/मारिजुआना का सेवन किया था। डॉक्टर ने उससे पूछा था कि वह गर्भपात क्यों कराना चाहती है, तब उसने बताया कि उसने काफी मात्रा में गांजा लिया था। शायद इसी वजह से उसके कमरे में हमेशा सुगंधित मोमबत्तियां और फ्रेगरेंस रखी रहती थीं। मुझे लगता है कि वह उसकी गंध छिपाने के लिए ऐसा करती थी।”
गिरीबाला सिंह के बयान पर ट्विशा के पिता ने दी प्रतिक्रिया
ट्विशा शर्मा डेथ केस में पीड़िता के पिता नवनीधि शर्मा ने ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह महिला फिलहाल अग्रिम जमानत पर बाहर है और जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रही है। मीडिया के सामने आकर इस तरह मृतक की छवि खराब करना और बेबुनियाद आरोप लगाना कानून का उल्लंघन है।
अब हमारी बेटी को न्याय दिलाने का समय है। उसकी मौत को इतने दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक हमारी बेटी के शव का दूसरा पोस्टमार्टम (PM-2) नहीं हो पाया है। प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है, ताकि सबूतों से छेड़छाड़ की जा सके। न्यायपालिका में इतने ऊंचे पदों पर रहे लोग ही उसी व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं। हमारे पास कोई पहुंच या प्रभाव नहीं है। खासतौर पर अग्रिम जमानत मिलने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी मुख्य मांग है कि जल्द से जल्द दूसरा पोस्टमार्टम (PM-2) कराया जाए। ये लोग चाहते हैं कि शव खराब हो जाए और प्रक्रिया में देरी होती रहे, ताकि हम निराश होकर यहां से चले जाएं। इस मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य को सौंपी जानी चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट या भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।”