जो काम सरकार और उसका पर्यटन विभाग नहीं कर पाया, वह काम विदेश से आए सैलानियों ने कर दिखाया। मध्यप्रदेश में रानी रूपमती और बाज बहादुर के ऐतिहासिक स्थल मांडू (धार) का अध्ययन करने आए गोरे छात्रों ने अपने हाथों से खुद ही सौ मीटर लंबी सड़क बना दी। वह भी महज एक घंटे में।
मध्य प्रदेश में कई नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे की हालत दिग्विजय सिंह के शासनकाल के मुकाबले बेहतर हुई है और मुख्यमंत्री 95,000 किमी सड़कें बनाने का दावा भी करते हैं, लेकिन राज्य में बहुत सी सड़कों की हालत अब भी खराब है। इस वर्ष हुई भारी बरसात के कारण कई सड़कें बह गई हैं।
धार जिले में इस टूटी सड़क पर से लाखों लोग गुजरे होंगे। लेकिन सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी अहमदाबाद की अमेरिकी छात्रा नतालिया एबाड और इस्राइल, नीदरलैंड्स, स्पेन, इंग्लैंड और यूरोप के अन्य देशों के करीब 119 छात्रों ने 23 सितंबर को जब बस से मांडू जा रहे थे तो यह देखकर स्तब्ध थे कि
वहां सड़क नहीं थी।
बस आगे नहीं बढ़ रही थी। गोरे छात्रों की यह टीम आनन-फानन में पास में पड़ी ईंटों को उठाकर लाई और सड़क में बने बड़े-बड़े खड्डे भर दिए।
ईंटों के ऊपर वहीं पड़ी मिट्टी डाल दी गई। करीब एक घंटे की मेहनत के बाद वहां गाड़ी निकलने लायक एक सड़क तैयार हो गई थी। अहमदाबाद से आए छात्रों का अनुभव था कि मध्य प्रदेश में उन्हें खराब सड़कें मिलीं।