टीकमगढ़ जिले में दो साल पहले सिर से पिता का साया उठ गया। मां मेहनत-मजदूरी करके तीन बेटियों का भरण-पोषण करती है। उसके लिए बेटी का विवाह कर पाना एक सपने से कम नहीं था। लेकिन ग्रामीणों ने धर्म पिता बनकर न सिर्फ बेटी के हाथ पीले किए, बल्कि भव्य विवाह समारोह आयोजित किया। इतना ही नहीं, बेटी की विदाई में भी पूरा गांव शामिल हुआ और हर शख्स के आंखें नम थीं। गोर गांव के ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से एक आदिवासी परिवार की बेटी का विवाह कर मिशाल पेश की है।
मोहनगढ़ तहसील क्षेत्र के गोर गांव निवासी भोला सौंर मेहनत-मजदूरी और बटिया से खेती करके परिवार की गुजर-बसर करता था। मार्च 2021 में करंट लगने के कारण भोला की मौत हो गई। उसके बाद परिवार पर रोजी-रोटी का संकट छा गया। भोला की पत्नी राम देवी ने साहस नहीं खोया और मेहनत-मजदूरी करके तीनों बेटियों का भरण-पोषण शुरू किया।
बड़ी बेटी रामा ने 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। नीलम (13) कक्षा 7वीं और नंदिनी (9) कक्षा 5वीं की छात्रा है। बड़ी बेटी रामा की शादी में परिवार की आर्थिक तंगी बाधा बन रही थी। जानकारी लगने पर ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए बेटी का विवाह समारोह पूर्वक करने का निर्णय लिया। आदिवासी बेटी के विवाह में हर ग्रामीण ने सामर्थ्य अनुसार सहयोग किया।
विदाई में उमड़ा पूरा गांव...
27 जून को रामा का विवाह ग्रामवासियों द्वारा समारोह पूर्वक कराया गया। उसकी शादी सागर जिले के बंडा क्षेत्र अंतर्गत बछौना गांव में की गई। ग्रामीणों ने बताया कि हमने सामूहिक रूप बेटी का विवाह धूमधाम से करने का संकल्प लिया और उसे पूरा किया। बुधवार को सुबह जब बेटी की डोली उठी तो पूरे गांव के लोग विदाई में शामिल हुए।
ग्रामीणों की यह एकजुटता देखकर बाराती भी गदगद हो गए। ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से गांव की बेटी का धूमधाम से विवाह कराने में गोर निवासी बृजेश कुमार रावत, शिव कुमार चतुर्वेदी, लक्ष्मी प्रसाद दीक्षित, अरविंद कुमार साहू, हीरालाल यादव, फूल सिंह यादव आदि ने महत्वूपर्ण भूमिका निभाई।