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MP News: 17 साल के लड़के की मौत का लाइव वीडियो, वो झटपटाता रहा, बचने का प्रयास किया, फिर भी खींच ले गई मौत

Thu, 03 Oct 2024 07:13 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़

सार

टीकमगढ़ शहर की पुरानी टिहरी का रहने वाला 17 साल का राज रैकवार कुंडेश्वर धाम में अपने परिजनों के साथ नहाने गया था। इस दौरान वह कुंड में डूब गया, अब उसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है।  
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पानी में डूब गया युवक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल कुंडेश्वर धाम में सोमवार की सुबह अपने परिजनों के साथ नदी में नहाने गया एक किशोर कुंड में डूब गया था। इसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें वह कुंड में करीब 2 मिनट तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करता रहा। उसकी लाश मंगलवार की रात को एसडीआरएफ टीम द्वारा बरामद की गई थी और बुधवार को पोस्टमार्टम करने के बाद पुलिस प्रशासन ने लाश को परिजनों के सुपुर्द कर दिया था।

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टीकमगढ़ शहर की पुरानी टिहरी का रहने वाला 17 वर्षीय राज रैकवार जिले के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल कुंडेश्वर धाम में अपने परिजनों के साथ सोमवार की सुबह नदी में नहाने और भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने गया था। जहां पर परिजन मंदिर में दर्शन करने चले गए, वहीं किशोर नदी में नहाने चला गया। जैसा कि आप सीसीटीवी में देख सकते हैं, नहाते-नहाते वह डिप्टी से नीचे बने नदी के कुंड में जा गिरा।



3 मिनट 30 सेकंड में जिंदगी का खेल
मौत का लाइव वीडियो 3 मिनट 30 सेकंड का है। सबसे पहले किशोर नदी में नहाते हुए दिखता है, इसके बाद वह कुंड में गिरता है और करीब 30 बार पानी उसे बाहर फेंकता है। लेकिन, वहां पर पकड़ने के लिए उसके पास कोई रस्सी नहीं थी। जैसा कि सीसीटीवी में दिख रहा है, दो लोग खड़े होकर इस घटना को अपनी आंखों से देख रहे हैं, लेकिन वह भी किशोर को बचाने कुंड में नहीं कूदते। क्योंकि पानी का बहाव इतना तेज है कि कुंड किशोर को कई बार ऊपर फेंकता है। नीचे जाते हुए वह दिखता है। 2 मिनट के दौरान वह कई बार पानी के ऊपर आता है फिर अंदर जाता है और अंत में वह पानी में समा जाता है।
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मंदिर प्रबंधन ने नहीं किया इंतजाम
टीकमगढ़ जिले के साथ-साथ बुंदेलखंड का यह धार्मिक प्रसिद्ध स्थल है, जहां हजारों की संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचते हैं। पिछले महीने भी उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के परिवार का एक चिराग बुझ गया था, जिसकी लाश 3 दिन बाद मिली थी। अगर एक साल की बात करें तो करीब आधा दर्जन बच्चे और व्यक्तियों की इस कुंड में मौत हो चुकी है, लेकिन मंदिर प्रबंधन द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई है जिससे कि डूबने से बचाया जा सके। मंदिर प्रबंधन के अध्यक्ष डॉ. नंद किशोर दीक्षित कहते हैं कि कई बार जंजीरें लगाई गईं, लेकिन तेज बहाव में वह टूट गईं। उन्होंने कहा कि बेरिकेड्स भी लगाए गए थे, जिन्हें कुछ दिन पहले प्रशासन द्वारा उठा लिया गया है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था के लिए मंदिर प्रबंधन के साथ ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि वहां पर व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जैसे ही नदी का पानी कम होगा तो एक बार पुनः जंजीरें लगाए जाएंगे और सूचना बोर्ड पहले से लगे हुए हैं। वहां पर अगर किसी गार्ड की ड्यूटी लगाई जाती है, तो लोग गार्ड के साथ गाली-गलौज करते हैं और नदी में नहाने चले जाते हैं।
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