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Tikamgarh: बहुचर्चित मनोज यादव हत्याकांड में सभी आरोपी बरी, 10 साल बाद आया फैसला; अदालत ने दिया संदेह का लाभ

Fri, 26 Jun 2026 09:34 AM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़

सार

टीकमगढ़ के बहुचर्चित मनोज यादव हत्याकांड में करीब 10 साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। पढ़ें पूरी खबर
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कोर्ट का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टीकमगढ़ के बहुचर्चित मनोज यादव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। लगभग एक दशक तक चले इस चर्चित मुकदमे के बाद आए फैसले से जिले में एक बार फिर इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
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आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि 16 दिसंबर 2016 को मनोज यादव हत्याकांड के संबंध में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान दो आरोपियों कुंवर लाल यादव और रघुनाथ सिंह के नाम प्रकरण से अलग कर दिए थे। इसके बाद तत्कालीन एक नाबालिग आरोपी सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या का मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

इनको संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। इसके चलते न्यायालय ने आरोपी नरेंद्र सिंह, चंदन सिंह, केशव सिंह, कुलदीप सिंह और रामनाथ को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं मामले के तत्कालीन नाबालिग आरोपी पंकज सिंह को इससे पहले ही किशोर न्यायालय द्वारा बरी किया जा चुका था।
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मनोज यादव हत्याकांड उस समय जिले का सबसे चर्चित मामला बन गया था।

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घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चाएं हुई थीं। मामला इतना संवेदनशील था कि इसके प्रभाव की चर्चा विधानसभा चुनावों तक में हुई और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे उस दौर में कांग्रेस को हुए राजनीतिक नुकसान से भी जोड़कर देखा था।
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अब इस पर टिकी सबकी नजरें
करीब दस वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। न्यायालय के निर्णय के बाद सभी आरोपियों को राहत मिली है, वहीं यह फैसला जिले के चर्चित आपराधिक मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। इस मामले पर अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देता है या नहीं। फिलहाल जिला न्यायालय के फैसले के बाद सभी आरोपी कानूनी रूप से दोषमुक्त हो गए हैं।
 
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