राजस्व विभाग की टीम ने नपती कर नपा सीएमओ को सौंपा प्रतिवेदन
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राजस्व विभाग का दल नरसिंह घाट नाले का सीमांकन करने के लिए पहुंचा। सीमांकन के दौरान नाले पर कॉलोनाइजर का अवैध कब्जा मिला, लेकिन कॉलोनाइजर और अधिकारियों की मिलीभगत का आलम ये है कि नपती के बाद भी अतिक्रमण का खुलासा करने में अधिकारी बचते हुए दिखाई दिए। नपा सीएमओ राजस्व विभाग के पाले में और राजस्व नपा के पाले में गेंद डालते हुए दिखा। नियमानुसार नाले के 9 मीटर की परिधी में निर्माण ही नहीं किया जा सकता है, यहां तो नाले पर कॉलोनाइजर ने बगीचा और सड़क बना डाली है।
राजस्व विभाग के अनुसार सर्वे नंबर 1456 जोकि निजी नंबर है। इसपर नगर पालिका के रिकार्ड में नाला बताया जाता है। इसमें कुछ जमीन मेसर्स कमल रियल इस्टेट मंदसौर द्वारा भागीदार संजय सिंहल खसरा नंबर 1449 भू राजस्व 6077 शासकीय रिकार्ड में दर्ज है। इस जमीन और इसके आस-पास की जमीन पर अमित अग्रवाल द्वारका सेठिया सहित अन्य जमीन कारोबारी द्वारा बीते दिनों एक कॉलोनी का निर्माण किया है। इमसें नाले पर भी करीब 15-20 फीट कब्जा किया है। नाले पर कॉलोनी का बगीचा और रास्ते बनाए गए है। राजस्व दल की नपती में एक छौर पर नाले पर करीब 20-25 फीट तक अवैध रूप से कब्जा चिन्हित किया है। जबकि दूसरे छौर पर करीब 2-3 फीट कब्जा मिला है।
नाले को दफन कर दिया अधिकारी मौन
अधिकारी और पटवारी जनप्रतिनिधियों के आगे अधिकांश बार बेबस दिखाई देते है। इसलिए नियम कायदें तांक पर रखकर कॉलोनाइजर एक के बाद एक शहर के नालों पर कब्जा करते जा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण मंदसौर नगर पालिका पर बीते करीब 40 वर्ष से अधिक समय से बीजेपी का कब्जा है। सरकार भी प्रदेश में करीब 20 साल से बीजेपी की है। इसी अवधि में सरकारी नालों को खत्म कर अवैध निर्माण हुआ है। अधिकारी चाहकर भी निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर सकते है। ये ही कारण है कि भू-माफिया और रसूखदारों में कानून का डर नहीं बचा है। जिस मामले में एफआईआर होना चाहिए, उसमें नपती करने के बाद अतिक्रमण चिन्हित कर अधिकारी फाईल को भी राजनीतिक दबाव में ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। धीरे-धीरे मानो अराजकता की स्थिति निर्मित होती जा रही है।
नपती के दौरान ये थे मौजूद
नाले व कालोनी की नपती के दौरान आरआई विकास चौहान, पटवारी महेश पाटीदार, प्रवीण व्यास, नगर पालिका के कार्यपालन यंत्री पीएस धावें, पटवारी जगदीश मोड़ सहित राजस्व और नपा कर्मचारी भी उपस्थित थे।
मैंने नहीं देखा कितना अतिक्रमण मिला: सीएमओ
मामले में नगर पालिका सीएमओ सुधीर सिंह का कहना है की राजस्व विभाग की टीम नाले का सीमांकन करने के लिए गई थी। उन्होंने नपती करने के बाद अपने प्रतिवेदन में कितना अतिक्रमण नाले पर पाया है। फिलहाल इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
मैंने नहीं ली आज जानकारी: एसडीएम
एसडीएम शिवलाल शाक्य ने कहा की राजस्व विभाग के दल को नपती करने के लिए भेजा था। लेकिन मैं उनसे जानकारी नहीं ले पाया हूं। सोमवार को इस संबंध में जानकारी लेकर आपको बता पाऊंगा। अगर नाले पर अतिक्रमण चिन्हित हुआ है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।