युवाओं में खेलों के प्रति प्रोत्साहन के लिए होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी मध्य प्रदेश सरकार कर रही है। प्रदेश शासन आयोजन को सफल बनाने में जुटा हुआ है। करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खेलो इंडिया के विजेताओं को मेजबान मध्य प्रदेश के खेल अलंकरण के योग्य नहीं माना जाता।
मध्य प्रदेश ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष ओम सोनी ने कहा कि खेल अलंकरण के लिए राष्ट्रीय चैंपियनशिप से ज्यादा अंक राष्ट्रीय खेलों के होते हैं। मगर हमारे प्रदेश में खेलो इंडिया की सफलता को मान्यता नहीं मिलती। खेलो इंडिया यूथ गेम्स के अंक भी राष्ट्रीय खेलों की तर्ज पर ज्यादा होने चाहिए। वरना आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च करने का खिलाड़ियों को कोई फायदा नहीं होगा।
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युवाओं में खेलों के प्रति प्रोत्साहन के लिए होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेजबानी मध्य प्रदेश सरकार कर रही है। प्रदेश शासन आयोजन को सफल बनाने में जुटा हुआ है। करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खेलो इंडिया के विजेताओं को मेजबान मध्य प्रदेश के खेल अलंकरण के योग्य नहीं माना जाता।
प्रदेश में खेलो इंडिया यूथ गेम्स का पांचवा संस्करण 30 जनवरी से 11 फरवरी तक इंदौर समेत आठ शहरों में होगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए शहरभर में पोस्टर लगाए गए हैं। आयोजन को सफल बनाने के मद्देनजर कमिश्नर और कलेक्टर सहित आला अधिकारी नियमित बैठकें कर रहे हैं। शहर के सभी खेल संघों को स्पर्धा कराने के लिए कहा गया है ताकि शहर में माहौल बने।
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खेलो इंडिया गेम्स का विजेता खिलाड़ी खेल अलंकरण के लिए पात्र नहीं होता
इंदौर के होलकर स्टेडियम में हुए अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान भी खेलो इंडिया गेम्स का प्रचार किया गया। मगर खुद मेजबान प्रदेश में ही इस स्पर्धा का कोई मूल्य नहीं है। प्रदेश सरकार की ओर से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर खेल अलंकरण से नवाजा जाता है। इसके लिए खेल संघों द्वारा आयोजित प्रतियोगिता के सफल खिलाड़ियों को अंक दिए जाते हैं। उसके आधार पर अलंकरण के लिए चयन होता है, लेकिन इसमें खेलो इंडिया यूथ गेम्स शामिल नहीं है। यानी, खेलो इंडिया गेम्स में जीतने के बाद भी खिलाड़ी खेल अलंकरण के लिए पात्र नहीं होता है।
हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आयोजन के सफल खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए पांच लाख रुपये सालाना मदद की घोषणा की है।
'खेल अलंकरण की जरूरत नहीं है'
वहीं, खेल विभाग के संयुक्त संचालक बीएस यादव का कहना है कि साल 2018 में खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेलो इंडिया यूथ गेम्स शुरू हुए। टॉप आठ खिलाड़ियों को साई द्वारा पांच लाख रुपये आठ साल तक ट्रेनिंग के लिए दिए जाते हैं। इसलिए खेल अलंकरण की जरूरत नहीं है। सीएम ने भी खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष देने की घोषणा की है।