चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग
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मध्य प्रदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने की तैयारी सरकार ने तेज कर दी है। शनिवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि सरकार ने पाठ्यक्रम समेत अन्य तैयारी करने के लिए समिति गठित कर दी है। समिति में 10 सदस्य होंगे। मंत्री सारंग ने कहा कि छात्रों को हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने का विकल्प होगा।
प्रदेश सरकार ने पिछले साल एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने को लेकर योजना बनाने की बात कही थी। मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि शुक्रवार को एमबीबीएस की पढ़ाई को हिंदी में कराने को लेकर बैठक की गई थी। हमने एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने की कार्ययोजना बना ली है। इसके लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई है। मेडिकल कॉलेज में लेक्चर हिंदी में कराने के भी प्रयास किए जाएंगे। मंत्री सारंग ने बताया कि अगले सत्र से छात्रों को हिंदी में वैकल्पिक पढ़ाई कराने को लेकर विचार किया जा रहा है।
मंत्री सारंग ने कहा कि कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। मातृभाषा में लर्निंग के परिणाम और ज्यादा सुखद होते हैं। इसलिए हमने निश्चय किया है कि सिलेबस में बिना किसी बदलाव के हिंदी में भी वह पाठ्यक्रम आ सके। इसके लिए तैयारी कर ली है। मंत्री ने बताया कि सिलेबस को हिंदी में तैयार करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को शासन की तरफ से यह जिम्मेदारी दी गई है।
बता दें एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में करवाने की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में गणतंत्र दिवस के मौके पर की थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि इससे छात्रों को फायदा होगा। इससे पहले विश्व हिंदी दिवस के मौके पर भी हिंदी में पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर ऐलान किया गया था।
मंत्री सारंग ने विशेषज्ञों के साथ की चर्चा
मंत्री सारंग ने चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने एवं एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के विषयों के लिए हिंदी में सप्लिमेंट्री पुस्तकों को तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों से चर्चा की। मंत्री सारंग ने अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रजिस्ट्रार तथा एम्स भोपाल एवं गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सकों के साथ आयुक्त चिकित्सा शिक्षा की उपस्थिति में 28 जनवरी को मंथन किया। चिकित्सा पढ़ाते समय शिक्षक हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करेंगे। हिंदी पृष्ठभूमि से आए छात्रों का अंग्रेजी माध्यम से 2 माह पढ़ाई एवं 2 माह हिंदी भाषा के उपयोग से उनके पठन-पाठन का आकलन किया जाएगा। दूसरे चरण में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 03 विषयों (एनाटॉमी, फिजियोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री) की हिंदी भाषा में पूरक संदर्भ पुस्तकों को तैयार किया जाएगा।
तीन समितियों का गठन किया
इस कार्ययोजना को पूर्ण करने के लिए तीन समिति तैयार करने का निर्णय लिया गया है। चिकित्सा पाठ्यक्रम में हिंदी के उपयोग एवं हिंदी में पूरक संदर्भ पुस्तक तैयार करने के लिए कार्ययोजना बनाने के लिए समिति बनाई गई है। इस कार्य योजना को मूर्त रूप देने हेतु अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय का मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा जिससे कि इस प्रकल्प का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विषय एनाटॉमी, फिजियोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री की हिंदी में पूरक संदर्भ पुस्तके तैयार करने हेतु उपसमिति का गठन किया गया है।