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गोडसे यात्रा पर बोले दिग्विजय: भाजपा-संघ-हिंदू महासभा के कुछ तत्व हैं नफरत के सौदागर

Sun, 07 Mar 2021 11:03 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर अजाला, इंदौर
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इंदौर में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से की बातचीत - फोटो : सोशल मीडिया
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कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने रविवार को बड़ा बयान दिया है। इंदौर में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ तत्व नफरत के सौदागर हैं।उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के संपूर्ण जीवन चरित्र से जुड़े तथ्यों को जनता के सामने लाने के मकसद से अखिल भारत हिंदू महासभा की 14 मार्च को प्रस्तावित यात्रा की निंदा की।

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गोडसे यात्रा को लेकर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर सिंह ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा के कुछ तत्व भारत वर्ष की सर्वधर्म समभाव की परंपरा, संस्कार और संस्कृति के विरोधी हैं। यह (तत्व) नफरत के सौदागर हैं और नफरत फैला कर हिंसा करते हैं।’

उन्होंने कहा कि इन तत्वों की कथित तौर पर वही विचारधारा है जिस विचारधारा के चलते नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्व की हत्या की थी, इसलिए वह गोडसे को लेकर हिंदू महासभा की प्रस्तावित यात्रा की निंदा करते हैं।
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हिंदू महासभा के नेताओं ने प्रस्तावित कार्यक्रम के हवाले से बताया कि गोडसे के संपूर्ण जीवन चरित्र से जुड़े तथ्यों को जनता के सामने लाने के उद्देश्य से निकाली जाने वाली यह यात्रा 14 मार्च को ग्वालियर से वाहन रैली के रूप में शुरू होकर दिल्ली पहुंचेगी और इसमें महासभा की 17 राज्यों की इकाइयों के प्रमुख शामिल होंगे।

बहरहाल, इन दिनों स्वयं कांग्रेस को ग्वालियर नगर निगम के पार्षद बाबूलाल चौरसिया को पार्टी में वापस लेने पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जो पिछले चुनावों में हिंदू महासभा से जुड़कर पार्षद बने थे और गोडसे की अर्धप्रतिमा की स्थापना में कथित तौर पर शामिल रहे थे।

सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस में चौरसिया की वापसी को मीडिया निरर्थक तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है। उन्होंने कहा, चौरसिया ने हिंदू महासभा में रहने के दौरान गोडसे के पक्ष में जो बयानबाजी की थी, हम उसकी निंदा करते हैं। वैसे इस बयानबाजी को लेकर उन्होंने पहले ही माफी मांग ली है।

केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ सिंह की अगुवाई में सूबे में जगह-जगह किसान महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन अब तक इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को शामिल होते नहीं देखा गया है। इस बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘यह किसान महापंचायतें गैर राजनीतिक हैं। इनमें कमलनाथ की ओर से उनके वह प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जो किसान संगठनों से जुड़े हैं।’

'जी-23' के सभी नेता सोनिया और राहुल को अपने नेता बता चुके

कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के 'जी-23' धड़े की गतिविधियों को पार्टी आलाकमान को सीधी चुनौती मानने से साफ इनकार करते हुए दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस खेमे में शामिल सारे लोग कह चुके हैं कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही उनके नेता हैं। मीडिया के यह कहे जाने पर कि 'जी-23' के नेता अपनी गतिविधियों के जरिए कांग्रेस आलाकमान को सीधी चुनौती दे रहे हैं, सिंह ने तुरंत जवाब दिया, 'यह (पार्टी आलाकमान को) बिल्कुल भी चुनौती नहीं है। जी-23 के सारे लोग कह चुके हैं कि उनके नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही हैं।'

कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के पद पर सोनिया गांधी के लंबे समय से बने रहने और पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव में विलंब के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय ने उल्टा सवाल करते हुए कहा, 'इसमें आपको (मीडिया) क्या आपत्ति है? आप कांग्रेस के सदस्य हैं क्या? आपने कभी भाजपा या संघ से पूछा कि क्या उनके यहां चुनाव होते हैं?' गौरतलब है कि कांगेस के 23 नेताओं ने पिछले साल अगस्त में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को पत्र लिखा था और पार्टी में संगठनात्मक बदलाव करने के साथ ही पूर्णकालिक पार्टी अध्यक्ष की मांग की थी। इन नेताओं के समूह को 'जी-23' भी कहा जाता है।

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नए कृषि कानूनों से विदेशी कंपनियां हमारे किसानों का शोषण करेंगी

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों से विदेशी कंपनियां हमारे देश के किसानों का शोषण करेंगी। भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के ग्राम शाहपुर में आयोजित ‘खाट पंचायत’ में सिंह ने इन कृषि कानूनों की खामियां बताते हुए कहा, ‘अंग्रेजों के जमाने में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में धंधा करने आई थी और उसने भारत में 150 साल तक राज किया। अब देश में यही हालत पैदा हो रही है। अब विदेशी कंपनियां भारत में आएंगी और किसानों का शोषण करेंगी तथा उनकी जमीनें खरीदेगी।’

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी जापान की कंपनियां भारत में जमीन खरीद रही हैं और इन तीन कृषि कानूनों के आ जाने से और बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां भी यहां आ जाएंगी और किसानों की जमीन खरीद लेंगी। सिंह ने कहा कि भाजपा के गठबंधन में शामिल रहे दल ही इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं और अकाली दल ने तो गठबंधन छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कृषि कानून किसान विरोधी हैं और अगर ये वापस नहीं लिए गए तो देश में किसान और खेती दोनों को खत्म कर देंगे।

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