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सिंगरौली बैंक लूट कांड मामला: नेपाल में बैठा मास्टरमाइंड दे रहा था कमांड, दस विशेष टीमें गठित; छापेमारी जारी

Thu, 23 Apr 2026 08:41 AM IST
सिंगरौली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली

सार

सिंगरौली बैंक लूट कांड में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नेपाल में बैठा मास्टरमाइंड इंटरनेट कॉलिंग के जरिए गिरोह को निर्देश दे रहा था। पुलिस जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। पढ़ें क्या थी इस लूट कांड की कहानी? 
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पुलिस ने जांच की तेज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिंगरौली में घटित बैंक लूट कांड ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराधियों ने इस वारदात को 17 अप्रैल को अंजाम दिया था। दिनदहाड़े पांच हथियारबंद बदमाशों ने रिवॉल्वर दिखाकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लूट की थी। वहीं, पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। बड़ी बात यह है कि इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड भारत में नहीं, बल्कि नेपाल में बैठकर गंभीर अपराधिक वारदात को अंजाम दे रहा था।

पुलिस जांच के मुताबिक विदेशी हैंडलर इंटरनेट कॉलिंग के जरिए आरोपियों के संपर्क में था। गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार ने पूछताछ में बताया कि गैंग के सदस्य एक-दूसरे को ठीक से नहीं जानते थे। सभी को निर्देश केवल नेपाल में बैठे हैंडलर से ही मिलते थे। पकड़ से बचने के लिए आरोपियों ने सोशल मीडिया और सामान्य कॉलिंग से दूरी बना रखी थी।

मोरवा में किराये का कमरा लेकर रोज होती थी रेकी
डकैती की योजना बेहतर तरीके से बनाई गई थी। आरोपियों ने मोरवा क्षेत्र में एक कमरा किराये पर लिया था। करीब एक महीने तक बैंक की गतिविधियों पर नजर रखी गई। वे रोज बैढ़न पहुंचकर दिनभर रेकी करते थे और शाम को वापस लौट जाते थे। 17 अप्रैल की तारीख पहले से तय कर रखी थी। पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस के अनुसार गिरोह के सभी सदस्य 18 से 22 वर्ष के हैं और पेशेवर अपराधी हैं। ये अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं और वारदात के बाद लगातार स्थान बदलते रहते थे। मुख्य आरोपी फंटूश उर्फ ननकी बिहार के नालंदा का निवासी बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी झारखंड समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं।

कनपटी पर पिस्टल, दहशत में स्टाफ और ग्राहक
बैंक मैनेजर करुणा बछर ने बताया कि बदमाशों ने बैंक में घुसते ही उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी थी और अलार्म बजाने पर गोली मारने की धमकी दी थी। इस दौरान बैंक में मौजूद स्टाफ और ग्राहक पूरी तरह दहशत में आ गए थे। इस घटना ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि 2018 में बैंक खुलने के बाद यहां कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। घटना के बाद अब एक निजी कंपनी के सशस्त्र गार्ड की नियुक्ति की गई है।

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10 टीमें तलाश में, कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10 विशेष टीमें गठित की गई हैं और लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही पुलिस बैंक कर्मचारियों की भूमिका को भी खंगाल रही है, ताकि किसी भी अंदरूनी मिलीभगत की संभावनाओं से इनकार किया जा सके। इस खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि अब यह केवल डकैती नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से जुड़ा संगठित अपराध बनकर सामने आ रहा है।

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