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क्या राहत की राजनीति है शिवराज का उपवास?

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मध्य प्रदेश में ओलापीड़ित किसानों को राहत पहुंचाने की राजनीति ने गति पकड़ ली है। भोपाल में जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करीब चार घंटे अपने मंत्रियों के साथ उपवास पर बैठे, वहीं मध्य प्रदेश के भाजपा सांसदों ने सुषमा स्वराज के नेतृत्व में दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात की।
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जब शिवराज उपवास पर बैठे तो कांग्रेसी खेमा कहां चुप बैठने वाला था। कांग्रेसियों ने शिवराज सरकार के खिलाफ मौन प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग को शिकायत कर कहा कि शिवराज का उपवास चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि प्रदेश में अब तक करीब छह किसान ओला-पाला के बाद आत्महत्या कर चुके हैं।

सात करोड़ मिले

होटल पलाश तिराहे पर शिवराज के साथ उनके प्रमुख मंत्री गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय, यशोधरा राजे सिंधिया, मायासिंह, राजेंद्र शुक्ल भी उपवास पर बैठे। उपवास के दौरान विभिन्न संगठनों ने करीब सात करोड़ रुपए की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की है।

शिवराज ने कहा कि भले ही सरकार को विकास कार्य रोकने पड़ें, किसानों को पूरी ताकत से मदद की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने संवैधानिक दायित्व से मुंह चुरा रही है। उन्होंने कहा कि उपवास का उद्देश्य किसानों की बदहाली की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कराना है। दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है।

धरने पर सरकार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनावों को देखकर सत्ता की राजनीति को विरोध की राजनीति में बदल लिया है। राजनीतिक हलकों में ये सवाल उठाए जा रहे थे कि आखिर सरकार कैसे धरने पर बैठ सकती है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने विधानसभा में जिस तरह से मुख्यमंत्री पर ‘ओला पर्यटन’ का आरोप लगाकर उन्हें घेरे में लिया, अब भाजपा की रणनीति किसानों के गुस्से को केंद्र के खिलाफ मोड़ने की है।

शिवराज की 5 मांगें

1. प्रदेश में ओलावृष्टि को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए
2. ओलावृष्टि पीड़ित किसानों को 5000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज दिया जाए
3. फसल बीमा योजना में बदलाव कर उसका पुनर्नवीकरण किया जाए
4. चने की खरीदी समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर करने के लिए नाफेड मध्य प्रदेश की एजेंसी से करार करे
5. अपीडा मध्य प्रदेश के बासमती धान को भी बासमती की श्रेणी में शामिल किया जाए

केंद्र पर जड़े आरोप

एक दिन पहले ही शिवराज सिंह और भाजपा ने आरोप लगाए थे कि वे ओल-पीड़ित किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने मिलने तक का वक्त नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे का कहना है कि मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं। जब शिवराज दिल्ली गए उस समय प्रधानमंत्री विदेश गए थे।

शिवराज ने कहा है कि केंद्र सरकार ने वादाखिलाफी की है। केंद्र से मांग की गई थी कि तत्काल 5000 करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकार को किसानों की मदद के लिए दी जाए। लेकिन केंद्र ने कोई मदद नहीं दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस मुश्किल घड़ी में किसानो के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने नई फसल बीमा योजना बनाने की घोषणा भी की है।
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कांग्रेस का हल्ला बोल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिवराज सिंह अपनी विफलता को केंद्र के माथे डाल रहे हैं। सर्वे और नुकसान का आकलन करने के पूर्व ही शिवराज सिंह ने राजनीतिक माइलेज के लिए 2000 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा कर दी और अब राज्य सरकार चुनाव के मौके पर केंद्र पर आरोप लगाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में अब तक फसलों को नुकसान का सर्वे तक नहीं हो पाया है। राहत पहुंचाने की बात अलग है। मुख्यमंत्री भी भाजपा वालों के खेतों में जाकर फसलों का नुकसान देख रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता जेपी धनोपिया और रामेश्वर नीखरा ने चुनाव आयोग को शिकायत कर कहा कि शिवराज और उनके मंत्रियों का उपवास चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है।
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